सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-परिचय का अंग 4
सूक्ष्म सौंज अर्चा बंदगी आत्म मांही राम है, पूजा ताकी होइ । सेवा वंदन आरती, साध करें सब कोइ ॥ 262 ॥ परिचै सेवा आरती, परिचै भोग लगाइ । दादू उस प्रसाद की, महिमा कही न जाइ ॥ 263 ॥ मांहि निरंजन देव है, मांहि सेवा होइ । मांहि उतारै आरती, दादू सेवक सोइ ॥ 264 ॥ दादू मांहि कीजै आरती, मांहि पूजा होइ । मांहि सतगुरू सेविये, बूझै विरला कोइ ॥ 265 ॥ संत उतारैं आरती, तन मन मंगलचार । दादू बलि बलि वारणैं, तुम पर सिरजनहार ॥ 266 ॥ दादू अविचल आरती, जुग-जुग देव अनन्त । सदा अखंडित एक रस, सकल उतारैं संत ॥ 267 ॥ ॥ सौंज मंत्र ॥ सत्यराम, आत्मा वैष्णव, सुबुद्धि भूमि, संतोष स्थान, मूल मंत्र, मन माला, गुरु तिलक, सत्य संयम, शील शुचिता,ध्यान धोवती, काया कलश, प्रेम जल, मनसामंदिर,निरंजन देव, आत्मा पाती, पुहुप प्रीति, चेतनाचंदन, नवधा नाम, भाव पूजा, मति पात्र, सहज समर्पण, शब्द घंटा, आनन्द आरती, दया प्रसाद, अनन्य एक-दशा, तीर्थ सत्संग, दान उपदेश, व्रत स्मरण, षट्गुण ज्ञान, अजपा जाप, अनुभव आचार, मर्यादा राम, फल दर्शन, अभि अन्तर सदा निरन्तर सत्य सौंज दादू वर्तते, आत्मा उपदेश, अंतर्गति पूजा ॥268 ॥ पीव सौं खेलूँ प्रेम रस, तो जियरे जक होइ । दादू पावै सेज सुख, पड़दा नाहीं कोइ ॥ 269 ॥ सूक्ष्म सौंज सेवक बिसरै आप कौं, सेवा बिसरि न जाइ । दादू पूछै राम कौं, सो तत्त कहि समझाइ ॥ 270 क ॥
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