भारतकोश
दशकुमारचरितम् (सटीक - पूर्वपीठिका व मूल कथा)

दशकुमारचरितम् (सटीक - पूर्वपीठिका व मूल कथा)

महाकवि दण्डी द्वारा

स्रोत: दशकुमारचरितम् (सटीक - पूर्वपीठिका व मूल कथा) · चौखम्बा संस्कृत सीरीज · 1968 (उद्गम)

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४३२ दशकुमारचरितम् ! [ उत्तरपीठिकायां कलासु वैचक्षण्यम्, अलब्धोपलब्धिलब्धानुरक्षणरक्षितोपभोगभुक्तानुसं- धानरुष्टानुनयादिष्वजस्रमभ्युपायरचनया बुद्धिवाचोः पाटवम्, उत्कृष्ट- शरीरसंस्कारात्सुभगवेषतया लोकसम्भावनीयतया परं सुहृत्प्रियत्वम्, गरीयसी परिजनव्यपेक्षा, स्मितपूर्वाभिभाषित्त्वम्, उद्रिक्तसत्त्वता, दाक्षि- ण्यानुवर्तनम् । अपत्योत्पादनेनोभयलोकश्रेयस्करत्वमिति । (२०) पानेऽपि नानाविधरोगभङ्गपटीयसामासवानामासेवनात्स्पृ- हणीयवयोव्यवस्थापनम्, अहंकारप्रकर्षादशेषदुःखतिरस्करणम्, अङ्ग- जरागदीपनादङ्गानोपभोगशक्तिसंधुक्षणम्, अपराधप्रमार्जनान्मनःशल्यो- अभ्युपायरचनया बुद्धिवाचोः मतिवचनयोः पाटवं कौशलम् । शरीरस्य संस्कारः शुद्धिः सम्भावनीयता सम्माननीयता । परिजनव्यपेक्षा परिजनेषु दाक्षिण्यम् । उद्रिक्तसत्त्वता समधिकसारत्वम् । (२०) पाने मद्यपाने । नानाविधानां रागाणां विषयाभिलाषाणां भङ्गे तरङ्गे विच्छित्तौ वा पटीयसाम् । आसवानां मद्यानाम् । आसेवनात् पानात् । स्पृहणी- यवयो यौवनं तस्य व्यवस्थापनं संरक्षणम् । अङ्गजस्य कामस्य रागः इच्छा तस्य दीपनाद् वृद्धेः । सन्धुक्षणमुत्तेजनम् । अपराधस्य अन्यकृतापराधस्य मार्जनाद् दूसरोंके मानसिक भावोंका ज्ञान होता हैं । निर्लोभ काममें प्रवृत्तिके भाव जागते हैं । सभी कलाओंमें नैपुण्य प्राप्त होता है । लब्ध वस्तुकी रक्षा', अलब्ध वस्तुके लाभका, रक्षित वस्तुके उपभोग का एवं भोगी हुई वस्तुओंसे उत्पन्न सुख-दुःखोंके विवेचनका ज्ञान प्राप्त होता है । रूठे हुए प्राणियोंके मनानेमें नित्य जो अनुनय-विनय करना पड़ता हैं उससे बुद्धि और वचनमें प्रगल्भता आती हैं । ऐसी स्थितिमें शारीरिक संस्कारों की ओर पूर्ण ध्यान रखना चाहिये तथा वेश-भूषा की ओर भी पर्याप्त ध्यान रखना चाहिये । इससे सर्व-साधारणके समक्ष सम्मान-प्राप्तिका अवसर मिलता है । मित्रोंमें अनुराग बढ़ता है तथा प्रीतिकी भी प्राप्ति होती है। हँस-हँस कर बातें करने का अभ्यास होता हैं । परिजनों पर संकोच न करनेका ज्ञान होता है । औदार्यका उदय एवं बलकी अभिवृद्धि होती है । सन्तानोत्पत्तिका लाभ होता है जिससे दोनों लोकोंमें कीर्ति बढ़ती है । यह मार्ग भी श्रेयस्कर है । (३२) इसी प्रकारसे मद्यपानसे भी अनेक लाभ होते हैं । मद्यपानसे विविध प्रकारके रोग दूर हो जाते हैं। मद्योंके सेवनसे मनुष्य मनचाही अवस्था प्राप्त कर लेता है । मद्यसे अहंकार बढ़ जाता है तिससे सभी तरहके क्लेश नष्ट हो जाते हैं । मदिरापानसे वासनाएँ उद्दीपित होती हैं जिससे स्त्रियोंके साथ सम्भोग करनेकी शक्ति प्रबल होती है !