देवी भागवत महापुराण

देवी भागवत महापुराण
Devi Bhagavata Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished889 पृष्ठ
पृष्ठ 186, कुल 889 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 186
॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥
॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥
श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण
द्वितीयः स्कन्धः
अथ प्रथमोऽध्यायः
ब्राह्मणके शापसे अद्रिका अप्सराका मछली होना और उससे राजा मत्स्य तथा मत्स्यगन्धाकी उत्पत्ति
| संस्कृत श्लोक | हिन्दी अनुवाद |
|---|---|
| ऋषय ऊचुः<br>आश्चर्यकरमेतत्ते वचनं गर्भहेतुकम्।<br>सन्देहोऽत्र समुत्पन्नः सर्वेषां नस्तपस्विनाम्॥ १ | ऋषिगण बोले—[हे सूतजी!] आपकी यह बात आश्चर्यजनक एवं रहस्यपूर्ण है। इस सम्बन्धमें हम सब तपस्वियोंको महान् सन्देह उत्पन्न हो गया है॥ १॥ |
| माता व्यासस्य मेधाविन्नाम्ना सत्यवतीति च।<br>विवाहिता पुरा ज्ञाता राज्ञा शन्तनुना यथा॥ २<br><br>तस्याः पुत्रः कथं व्यासः सती स्वभवने स्थिता।<br>ईदृशी सा कथं राज्ञा पुनः शन्तनुना वृता॥ ३<br><br>तस्यां पुत्रावुभौ जातौ तत्त्वं कथय सुव्रत।<br>विस्तरेण महाभाग कथां परमपावनीम्॥ ४<br><br>उत्पत्तिं वद व्यासस्य सत्यवत्यास्तथा पुनः।<br>श्रोतुकामाः पुनः सर्वे ऋषयः संशितव्रताः॥ ५ | हे मेधाविन्! पूर्वकालमें सत्यवती नामसे विख्यात व्यासजीकी माताका राजा शन्तनुके साथ जिस प्रकार विवाह हुआ, उन सतीके अपने घरमें रहते हुए भी उनसे पुत्ररूपमें व्यास कैसे उत्पन्न हुए, ऐसी सत्यवतीका शन्तनुने पुनः वरण कैसे किया और उनसे दो पुत्रोंकी उत्पत्ति कैसे हुई? हे सुव्रत! हे महाभाग! आप इस परम पावन कथाको विस्तारपूर्वक कहिये। आप व्यासजी तथा सत्यवतीकी उत्पत्तिका वर्णन कीजिये; हम सभी व्रतधारी ऋषि इस विषयमें सुननेके लिये उत्सुक हैं॥ २–५॥ |
| सूत उवाच<br>प्रणम्य परमां शक्तिं चतुर्वर्गप्रदायिनीम्।<br>आदिशक्तिं वदिष्यामि कथां पौराणिकीं शुभाम्॥ ६ | **सूतजी बोले—**मैं चतुर्वर्ग [धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष] प्रदान करनेवाली परमा आदिशक्तिको प्रणाम करके यह शुभ पौराणिक कथा कहूँगा॥ ६॥ |
| यस्योच्चारणमात्रेण सिद्धिर्भवति शाश्वती।<br>व्याजेनापि हि बीजस्य वाग्भवस्य विशेषतः॥ ७<br><br>सम्यक् सर्वात्मना सर्वैः सर्वकामार्थसिद्धये।<br>स्मर्तव्या सर्वथा देवी वाञ्छितार्थप्रदायिनी॥ ८ | जिनके विशिष्ट वाग्भव बीजमन्त्र (ऐं)-का किसी भी बहानेसे उच्चारण करते ही शाश्वती सिद्धि प्राप्त हो जाती है, उन इच्छित फल देनेवाली भगवतीका सभी लोगोंको अपनी समस्त कामनाएँ पूर्ण करनेके लिये समर्पण भावसे सम्यक् स्मरण करना चाहिये॥ ७-८॥ |
| राजोपरिचरो नाम धार्मिकः सत्यसङ्गरः।<br>चेदिदेशपतिः श्रीमान् बभूव द्विजपूजकः॥ ९ | उपरिचर नामके एक सत्यवादी, धर्मात्मा, ब्राह्मणपूजक तथा श्रीमान् राजा हुए, जो चेदि |