भारतकोश
देवी भागवत महापुराण

देवी भागवत महापुराण

Devi Bhagavata Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished889 पृष्ठ

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पृष्ठ 412

॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥
॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥

श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण

चतुर्थः स्कन्धः

अथ प्रथमोऽध्यायः

वसुदेव, देवकी आदिके कष्टोंके कारणके सम्बन्धमें जनमेजयका प्रश्न

जनमेजय उवाच
वासवेय मुनिश्रेष्ठ सर्वज्ञाननिधेऽनघ।<br>प्रष्टुमिच्छाम्यहं स्वामिन्नस्माकं कुलवर्धन॥ १जनमेजय बोले— हे वासवेय! हे मुनिवर! हे सर्वज्ञाननिधे! हे अनघ! हमारे कुलकी वृद्धि करनेवाले हे स्वामिन्! मैं [श्रीकृष्णके विषयमें] पूछना चाहता हूँ॥ १॥
शूरसेनसुतः श्रीमान्वसुदेवः प्रतापवान्।<br>श्रुतं मया हरैर्यस्य पुत्रभावमवाप्तवान्॥ २मैंने सुना है कि परम प्रतापी श्रीमान् वसुदेव राजा शूरसेनके पुत्र थे, जिनके पुत्ररूपमें साक्षात् भगवान् विष्णु अवतरित हुए थे॥ २॥
देवानापि पूज्योऽभून्नाम्ना चानकदुन्दुभिः।<br>कारागारे कथं बद्धः कंसस्य धर्मतत्परः॥ ३<br><br>देवक्या भार्यया सार्धं किमागः कृतवानसौ।<br>देवक्या बालषट्कस्य विनाशश्च कृतः पुनः॥ ४आनकदुन्दुभि नामसे विख्यात वे वसुदेव देवताओंके भी पूज्य थे। धर्मपरायण होते हुए भी वे कंसके कारागारमें क्यों बन्द हुए? उन्होंने अपनी भार्या देवकीसहित ऐसा क्या अपराध किया था, जिससे ययातिके कुलमें उत्पन्न कंसके द्वारा देवकीके छः पुत्रोंका वध कर दिया गया?॥ ३-४ १/२॥
तेन कंसेन कस्माद्वै ययातिकुलजेन च।<br>कारागारे कथं जन्म वासुदेवस्य वै हरेः॥ ५<br><br>गोकुले च कथं नीतो भगवान्सात्वतां पतिः।<br>गतो जन्मान्तरं कस्मात्पितरौ निगडे स्थितौ॥ ६<br><br>देवकी वसुदेवौ च कृष्णस्यामिततेजसः।<br>कथं न मोचितौ वृद्धौ पितरौ हरिणामुना॥ ७<br><br>जगत्कर्तुं समर्थेन स्थितेन जनकोदरे।<br>प्राक्तनं किं तयोः कर्म दुर्विज्ञेयं महात्मभिः॥ ८<br><br>जन्म वै वासुदेवस्य यत्रासीत्परमात्मनः।<br>के ते पुत्राश्च का बाला या कंसेन विपोथिता॥ ९<br>शिलायां निर्गता व्योम्नि जाता त्वष्टभुजा पुनः।साक्षात् भगवान् विष्णुने वसुदेवके पुत्ररूपमें कारागारमें जन्म क्यों ग्रहण किया? देवताओंके अधिपति भगवान् श्रीकृष्ण गोकुलमें किस प्रकार ले जाये गये और वे भगवान् होते हुए भी जन्मान्तरको क्यों प्राप्त हुए? अमित तेजस्वी श्रीकृष्णके माता-पिता वसुदेव और देवकीको बन्धनमें क्यों आना पड़ा? जगत्की सृष्टि करनेमें समर्थ उन भगवान् श्रीकृष्णने माता देवकीके गर्भमें स्थित रहते हुए ही अपने वृद्ध माता-पिताको बन्धनसे मुक्त क्यों नहीं कर दिया? उन वसुदेव तथा देवकीने महात्माओंद्वारा भी दुःसाध्य ऐसे कौन-से कर्म पूर्वजन्ममें किये थे, जिससे उनके यहाँ परमात्मा भगवान् श्रीकृष्णका जन्म हुआ? वे छः पुत्र कौन थे, वह कन्या कौन थी, जिसे कंसने पत्थरपर पटक दिया था और वह हाथसे छूटकर आकाशमें चली गयी तथा पुनः अष्टभुजाके रूपमें प्रकट हुई?॥ ५-९ १/२॥