धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१।६ ] यमकवग्गो [ ३ ४—अक्कोच्छि मं अवधि मं अजिनि मं अहासि मे । ये तं न उपनय्हन्ति वेरं तेसूपसम्मति ॥४॥ ( अक्रोशीत् मां अवधीत् मां अजैषीत् मां अहार्षीत् मे । ये तत् नोपनह्यन्ति वैरं तेषूपशाम्यति ॥४॥ ) अनुवाद—'मुझे गाली दिया'० ( ऐसा ) जो ( मनमें ) नहीं रखते उनका वैर शान्त हो जाता है । श्रावस्ती ( जेतवन ) काली ( यक्खिनी ) ५—न हि वेरेन वेरानि सम्मन्तीध कुदाचनं । अवेरेन च सम्मन्ति एस धम्मो सनन्तनो ॥५॥ ( न हि वैरेण वैराणि शाम्यन्तीह कदाचन । अवैरेण च शाम्यन्ति, एष धर्मः सनातनः ॥ ५ ॥ ) अनुवाद—यहाँ ( संसारमें ) वैरसे वैर कभी शान्त नहीं होता, अवैर से ही शान्त होता है, यही सनातन धर्म (=नियम ) है । श्रावस्ती ( जेतवन ) कोसम्बक भिक्खू ६—परे च न विजानन्ति मयमेत्थ यमामसे । ये च तत्थ विजानन्ति ततो सम्मन्ति मेधगा ॥६॥ ( परे च न विजानन्ति वयमत्र यंस्यामः । ये च तत्र विजानन्ति ततः शाम्यन्ति मेधगाः ॥ ६ ॥ ) अनुवाद—अन्य ( अज्ञ लोग ) नहीं जानते, कि हम इस ( संसार ) से जानेवाले हैं । जो इसे जानते हैं, फिर ( उनके ) मनके ( सभी विकार ) शान्त हो जाते हैं ।