भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

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२४।१४ ] तण्हावग्गो [ १५३ सारवद्रत्ता मणिकुण्डलेसु पुत्तेसु दारेसु च याऽपेक्षा ॥१२॥) अनुवाद—( यह ) जो लोहे लकड़ी या रस्सीका बन्धन है, उसे बुद्धि- मान ( जन ) दृढ़ बन्धन नहीं कहते, ( वस्तुतः दृढ़ बन्धन है जो यह) धन (=सारवत्) में रक्त होना, या मणि, कुण्डल, पुत्र स्त्रीमें इच्छाका होना है। ३४६-एतं दळ्हं बन्धनमाहु धीरा ओहारिनं सिथिलं दुप्पमुञ्चं । एतम्पि छेत्वान परिव्बजन्ति अनपेक्खिनो कामसुखं पहाय ॥ १३॥ ( एतद् दृढं बन्धनमाहुर्धीरा अपहारि शिथिलं दुष्प्रमोचम् । एतदपि छित्त्वा परिव्रजन्त्य- -नपेक्षिणः कामसुखं प्रहाय ॥ १३ ॥ ) अनुवाद—धीर पुरुष इसीको दृढ़ बन्धन, अपहारक शिथिल और दुस्त्याज्य कहते हैं,, (वह) अपेक्षा रहित हो, तथा काम-सुखों- को छोड़, इस (दृढ़) बन्धनको छिन्नकर, प्रव्रजित होते हैं। राजगृह ( वेणुवन ) खेमा ( बिम्बसार-महिषी ) ३४७-ये रागरत्तानुपतन्ति सोतं सयं कतं मक्कटको 'व जालं । एतम्पि छेत्वान बजन्ति धीरा अनपेक्खिनो सब्बदुक्खं पहाय ॥ १४॥