भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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४।११ ] पुप्फवग्गो [ २५ अनुवाद—जैसे रुचिर वर्णयुक्त और गन्धसहित फूल होता है, वैसे ही (वचनके अनुसार काम) करनेवालेकी सुभाषित वाणी सफल होती है । श्रावस्ती पूर्वाराम विशाखा (उपासिका) ५३-यथापि पुप्फरासिम्हा कयिरा मालागुणे बहू । एवं जातेन मच्चेन कत्तब्बं कुसलं बहुं ॥१०॥ (यथापि पुष्पराशेः कुर्यात् मालागुणान् बहून् । एवं जातेन मर्त्येन कर्त्तव्यं कुशलं बहु ॥ १० ॥ ) अनुवाद—जिस प्रकार पुष्पराशिसे बहुतसी मालायें बनाये, उसी प्रकार उत्पन्न हुये प्राणीको चाहिये कि वह बहुतसे भले (कर्मोंको) करे । श्रावस्ती आनन्द (थेर) ५४-न पुप्फगन्धो पटिवातमेति न चन्दनं तगरमल्लिका वा । सतञ्च गन्धो पटिवातमेति सब्बा दिसा सप्पुरिसो पवाति ॥११॥ (न पुष्पगन्धः प्रतिवातमेति न चन्दनं तगर-मल्लिके वा । सतां च गन्धः प्रतिवातमेति सर्वा दिशः सत्पुरुषः प्रवाति ॥११॥)