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ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Dhvanyaloka of Anandavardhana with Abhinavagupta Locana and Hindi Commentary

आचार्य आनन्दवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished680 पृष्ठ

पृष्ठ 51, कुल 680 में से

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( ४७ ) प्रस्तुत अनुवाद और व्याख्यान का आधार-भूत संस्करण चौखम्बा का 'बालप्रिया' वाला संस्करण ही रहा, अतः उसके ही स्वीकृत पाठभेद बहुत कुछ अपरिवर्तनों के साथ यहां लिए गए हैं। व्याख्यान के बाद अनेक स्थलों पर पुनर्विचार के बाद मैं अनेक परिवर्तन और शोधन की दृष्टि से प्रवृत्त हुआ और कुछ मुझे सफलता भी मिली। किन्तु खेद है कि उन परिवर्तनों का निर्देश यहां नहीं कर सका। यत्र-तत्र मुझसे जो कुछ भ्रान्तियां हो गई हैं उनके संशोधन की विनम्र आशा विद्वज्जनों से करता हूँ। मेरे विचार में सलोचन ध्वन्यालोक अभी अपने शोधन, अर्थनिश्चायन एवं मूल्याङ्कन के लिए अनेक प्रतिभाशाली विचारकों की एकनिष्ठ साधना की प्रतीक्षा में है। मैं अपने इस छोटे से प्रयत्न द्वारा ध्वन्यालोक के अभीष्ट अर्थ तक पहुँचने में यदि जिज्ञासुजनों का सहायक हुआ तो यही मेरे श्रम की सार्थकता होगी। मैंने अपने इस व्याख्यान एवं भूमिका में जिन विद्वानों की कृतियों से लाभ उठाया है उनका ऋणी हूँ। विशेषतः 'लोचन' के अर्थज्ञान में मुझे 'बालप्रिया' ने अधिक सहायता पहुँचाई है, अतः बालप्रियाकार श्री रामशारक महोदय का मैं विशेष ऋणी हूँ। पुनः अपनी त्रुटियों के प्रति विद्वानों से क्षमा-प्रार्थना के साथ— जगन्नाथ पाठक