ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Dhvanyaloka of Anandavardhana with Abhinavagupta Locana and Hindi Commentary
आचार्य आनन्दवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished680 पृष्ठ
पृष्ठ 52, कुल 680 में से
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शुद्धिपत्र
( ध्वन्यालोक )
| अशुद्ध | पृष्ठ | पंक्ति | शुद्ध |
|---|---|---|---|
| वर्णसंघटनार्धर्माश्च | १७ | ३ | सङ्घटनाधर्माश्च |
| तत्समतान्तःपातिनः | २३ | ४ | तत्समयान्तःपातिनः |
| व्याप्यन्त | १६१ | २ | व्याप्यन्ते |
| घेप्पन्ति | १७८ | २ | घेप्पन्ति |
| रूपकादिर- | २३७ | ३ | रूपकादेर- |
| वाच्यत्वे न | ३०० | १ | वाच्यत्वेन |
| शृङ्गारे ते न | ३२८ | ३ | शृङ्गारे तेन |
| ते न वर्णा | ३२८ | ५ | तेन वर्णा |
| गुणरूपत्वे गुणरूपत्वे | ३४७ | ४ | गुणरूपत्वे |
| एतच्च एमदीये | ४२८ | ६ | एतच्च मदीये |
( लोचन )
| अशुद्ध | पृष्ठ | पंक्ति | शुद्ध |
|---|---|---|---|
| -भावेनार्थवत्त्वा- | १० | १ | -भावेनार्थतत्त्वा-; -भावेनार्थत्वा-- |
| शब्दार्थयोश्चारुत्वं | १८ | १ | शब्दार्थयोर्यतश्चारुत्वं |
| मधुरिवौ | ८३ | २ | मधुरिपौ |
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