भारतकोश
ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Dhvanyaloka of Anandavardhana with Abhinavagupta Locana and Hindi Commentary

आचार्य आनन्दवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished680 पृष्ठ

पृष्ठ 53, कुल 680 में से

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पृष्ठ 53

विषय-सूची ( ध्वन्यालोक-लोचन ) प्रथम उद्योत पृष्ठ ( क ) लोचन का मङ्गलाचरण १ ( ख ) लोचनकार द्वारा स्वपरिचय २ ( ग ) ध्वन्यालोक का मंगलाचरण तथा उस पर विस्तृत व्याख्यान ३ १. ध्वनिविषयक तीन विप्रतिपत्तियां और ग्रन्थ का प्रयोजन ८ तीन प्रधान विप्रतिपत्तियों का संक्षिप्त निर्देश १४ अभावविकल्प के तीनों प्रकारों का संक्षिप्त निर्देश १५ अभाववादियों का प्रथम विकल्प १७ शब्द-अर्थ के चारुत्व के दो भेद १८ वृत्तियों का स्वरूप-विचार १९ अभाववादियों का द्वितीय विकल्प २३ अभाववादियों का तृतीय विकल्प २६ अभाववादियों के मत का उपसंहार २७ मनोरथकवि का ध्वनिविरोधी श्लोक २९ भाक्तवादियों का विकल्प २९ 'भक्ति' शब्द की व्युत्पत्ति और सङ्गति ३० लो० में 'गुणवृत्ति' का अर्थ ३३ अलक्षणीयतावादियों का मत ३५ ध्वनि-स्वरूप के प्रकाशन का उद्देश्य ३६ लो० में विभिन्न सम्बन्धों का निर्देश ३७ 'सहृदय' का स्वरूप ३९ काव्य में ध्वनि के अंशतत्ववादी भट्टनायक के मत का खण्डन ४० काव्य के मुख्य प्रयोजन के रूप में प्रीति या आनन्द का निर्देश ४१ २. ध्वनि-सिद्धान्त की भूमिका ४३ काव्यात्मभूत अर्थ के भेद : वाच्य और प्रतीयमान ४३ 'सहृदयश्लाघ्य' विशेषण के तात्पर्य का प्रतिपादन ४४ ३. वाच्य अर्थ के प्रतिपादन का अभाव ४६ ४. प्रतीयमान का वाच्य से भिन्नत्व ४७ 'महाकवि' व्यपदेश का कारण ४८ 'लावण्य' पर विचार ४९ प्रतीयमान के भेद ५० ४ ध्व० भू०