भारतकोश
ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Dhvanyaloka of Anandavardhana with Abhinavagupta Locana and Hindi Commentary

आचार्य आनन्दवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished680 पृष्ठ

पृष्ठ 55, कुल 680 में से

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( ५१ ) पृष्ठ अभाववादियों के प्रति उत्तर का उपसंहार १४२ ध्वनि के दो भेद १४३ अविवक्षितवाच्य ध्वनि का उदाहरण १४५ विवक्षितान्यपरवाच्य ध्वनि का उदाहरण १४६ भाक्तवादी के मत के दूषण का उपक्रम १४८ १४. भक्ति और ध्वनि के एकत्व का निषेध १४९ कवियों द्वारा उपचरित शब्दवृत्ति से व्यवहार के उदाहरण १५१ १५. उक्त्यन्तर से अशक्य चारुत्व का व्यञ्जक शब्द 'ध्वनि' है १५५ १६. रूढ़ शब्द भी ध्वनि के विषय नहीं होते १५६ १७. गुण-वृत्ति से बोध्य अर्थ में शब्द स्खलद्गति नहीं है १५७ १८. लक्षणा-व्यापार और ध्वनन-व्यापार का भिन्न-विषयकत्व १५९ भक्ति के ध्वनि का लक्षण होने पर अव्याप्ति का निर्देश १५९ गौण और लाक्षणिक के भेद का प्रतिपादन १५९ लक्षणा के भेद १६० रत्यादि-प्रतीति का शाब्दत्व न स्वीकारने वाले मीमांसक का मत एवं उसका दूषण १६१ रस-प्रतीति के अलौकिकत्व का उपपादन १६४ १९. भक्ति को किसी ध्वनि-भेद का उपलक्षण मान लेना १६७ २०. अलक्षणीयतावादी के मत का दूषण १६९ द्वितीय उद्योत १. अविवक्षितवाच्यध्वनि के दो भेद १७४ अर्थान्तरसंक्रमितवाच्य ध्वनि के उदाहरण १७५ अत्यन्ततिरस्कृतवाच्य ध्वनि के उदाहरण १८० २. विवक्षितान्यपरवाच्य ध्वनि के दो भेद १८३ ३. रसादि का ध्वनित्व १८३ भावध्वनि का उदाहरण १८४ व्यभिचारी भावों के तीन धर्म (उदय, स्थिति, अपाय) और सन्धि तथा शबलता १८४ रसध्वनि का उदाहरण १८८ ४. रसध्वनि का विषय १८९ रस के विषय में भट्टनायक के मत का उपपादन १९० पूर्वोक्त मत का खण्डन १९३ रस के सम्बन्ध में विभिन्न मत १९६ ५. रसाद्यलङ्कार का विषय २०१ शुद्ध रसाद्यलङ्कार का उदाहरण २०३ सङ्कीर्ण अङ्गभूत रसादि का उदाहरण २०६

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