ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Dhvanyaloka of Anandavardhana with Abhinavagupta Locana and Hindi Commentary
आचार्य आनन्दवर्धन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५३ ) पृष्ठ २७. अलङ्कारान्तर की प्रतीति में तत्परत्व न होने की स्थिति में ध्वनिव्यपदेशाभाव २८० पूर्वोक्त विषय के अपवाद का निरूपण २८२ उपमा-ध्वनि २८६ आक्षेप-ध्वनि २८७ शब्दशक्तिमूलानुरणनव्यङ्ग्य अर्थान्तरन्यासध्वनि २८८ अर्थशक्तिमूलानुरणनव्यङ्ग्य अर्थान्तरन्यासध्वनि २८९ व्यतिरेक-ध्वनि के भी दो प्रकार २९० उत्प्रेक्षा-ध्वनि २९१ : श्लेषध्वनि २९४ यथासंख्य ध्वनि २९५ ( लोचन में ) दीपक, अप्रस्तुतप्रशंसा, अपह्नुति आदि ध्वनि २९६ २८. अलङ्कार-ध्वनि की प्रयोजनवत्ता का प्रतिपादन ३०० २९. वस्तुमात्र से अलङ्कार के व्यङ्ग्य होने पर ध्वन्यङ्गता ३०१ ३०. अलङ्कारान्तर के व्यङ्ग्यत्व की स्थिति में ध्वन्यङ्गता ३०१ ३१. प्रतीयमान अर्थ के अस्फुटत्व में ध्वन्यभाव ३२. विवक्षितवाच्य के आभास का विवेक ३०३ ३३. अविवक्षितवाच्य के आभास का विवेक ३०७ ३४. ध्वनि का उपसंहार ३०९ तृतीय उद्योत १. ध्वनि के दोनों भेदों के पद-प्रकाश और वाक्यप्रकाश रूप ३१२ अविवक्षितवाच्य के अत्यन्ततिरस्कृतवाच्य प्रभेद में पदप्रकाशता ३१३ अविवक्षितवाच्य के अर्थान्तरसंक्रमित वाच्य में पदप्रकाशता ३१४ अविवक्षितवाच्य के अत्यन्ततिरस्कृतवाच्य प्रभेद में वाक्यप्रकाशता ३१७ अविवक्षितवाच्य के अर्थान्तरसंक्रमितवाच्य में वाक्यप्रकाशता ३१९ विवक्षितवाच्य के अनुरणनरूप व्यङ्ग्य के शब्दशक्त्युद्भव में पदप्रकाशता ३२० ,, ,, ,, वाक्यप्रकाशता ३२१ ,, ,, कविप्रौढोक्तिमात्रनिष्पन्न अर्थशक्त्युद्भव में पदप्रकाशता ३२१ ,, ,, ,, ,, वाक्यप्रकाशता ३२३ स्वतःसम्भविशरीर अर्थशक्त्युद्भव प्रभेद में पदप्रकाशता ३२३ ,, ,, वाक्यप्रकाशता ३२४ काव्यविशेष ध्वनि के पदप्रकाशत्वादि की अनुपपत्ति की शङ्का और परिहार ३२५ पूर्वोक्त विषयों का सङ्ग्रह द्वारा प्रतिपादन ३२६ २. वर्ण, पद आदि में अलक्ष्यक्रमव्यङ्ग्य ध्वनि ३२७ ३. वर्णों के रसद्योतकत्व का उपपादन ३२८ पद में अलक्ष्यक्रमव्यङ्ग्य का द्योतन ३३० पदावयव से द्योतन ३३०