ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंधर्मराज युधिष्ठिर और उसका एक कुत्ता छोड़कर और सबका पतन मेरुशिखर चढ़ते समय ही हुवा । मेरुशिखर चढ़नेपर स्वर्ग आया । इस वर्णनसे भी मेरुशिखरके विषयमें-उसकी भौगोलिक स्थितिके विषयमें कहने जैसी कोई जानकारी नहीं हुई । गीता अ० १०. श्लो० २४-बृहस्पति मुझे जान पुरोहित प्रधान जो— पुरोहित—प्राचीन कालमें राजाके राजकाज और धर्मकार्यमें आवश्यक सहायता और पथप्रदर्शन करनेवाले प्रमुख ब्राह्मणको पुरोहित कहा जाता था । यह पुरोहित राजाका शिक्षक, अंतरंग-मित्र, तथा पथप्रदर्शक होता था । ऋग्वेदमें ऐसे अनेक पुरोहितोंका उल्लेख मिलता है । दिवोदास भरत-वंशका प्रसिद्ध राजा । ग्रीकके इतिहासमें फिलिप और अलेक्झांडरका जो स्थान है वही स्थान भारतके प्राचीन इतिहासमें दिवोदास और सुदासका है । भरद्वाज दिवोदासका महान और कुशल राजपुरोहित था । शंबर दिवोदासका शत्रु । भरद्वाजने शंबरके विरुद्ध इंद्रकी शक्ति दिवोदासके पीछे खड़ी की । वैसे ही वरशिखाभोंसे पराजित, साधन हीन अभ्यवर्तिन् और प्रस्तोक भरद्वाजको पुरोहित बननेकी प्रार्थना करते हैं। भरद्वाज पुरोहित बन कर पथ-प्रदर्शन करता है। दोनो शक्तिसंपन्न होकर वरशिखाभोंको पराजित करते हैं। ऋग्वेदमें भरद्वाजकी भांति, श्रुतबंधु, कवष, प्रियमैध, वामदेव, कक्षीवान आदि पुरोहितोंके कर्तृत्वका उल्लेख है । वैसे ही विश्वामित्र और वसिष्ठ । दोनों सुदासके पुरोहित । सुदास दिवोदासका पुत्र । विश्वामित्रके पथ-प्रदर्शकत्वमें अश्वमेध यज्ञ करता है। इसमें अनेक राजा पराजित हो जाते हैं। पराजित राजा सब एक होकर सुदास पर आक्रमण करते हैं । तब पुरोहित वसिष्ठ ! वसिष्ठके पथप्रदर्शकत्वमें नौ राजाओंसे - जो एक साथ संगठित होकर आक्रमण करते हैं-लड़कार जीतता है । दोनों ओरकी सैन्य शक्ति देख कर आश्चर्य होता है । वेदमें “मेढने सिंहकी शिकार किया" इन शब्दोंसे इस युद्धका वर्णन किया है । आगे, न्यायदानमें भी पुरोहित सहायता देता था । कौटिलीय अर्थशास्त्रमें भी राज-पुरोहितके कर्तव्य, योग्यता, अधिकार आदिका उल्लेख है। कौटिलीय स्वयं एक प्रकारसे पुरोहित था । शुक्र जैसे दैत्योंका पुरोहित था वैसे बृहस्पति देवोंका पुरोहित था। राजा, मान्य, विद्वान, व नीतिसंपन्न ब्राह्मणोंको सम्मानपूर्वक बुलाकर अथवा उनके पास जा कर पौरोहित्य स्वीकार करनेकी प्रार्थना करते थे । बृहस्पति- बृहस्पति इस पुरोहित-वर्गका श्रेष्ठतम पुरोहित थे। बृहस्पति शब्दका अर्थ वाचस्पति-वाचाका पति अथवा महान तपोघन । बृहस्पति सूक्त द्रष्टा ऋषि हैं । बृहस्पति युद्ध विशारद भी हैं। धनुष्य, बाण, स्वर्ण, परशु इसके हत्यार हैं । ये अत्यंत पराक्रमी थे। इनके रथके घोडे लाल होते थे । ये अत्यंत चरित्रवान् सुद्याचरणी तथा परोपकारी थे। बृहस्पतिने इंद्रको ज्ञानेश्वरी ५४