भारतकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

DevanagariMarathipublished1,172 पृष्ठ

पृष्ठ 1019, कुल 1172 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1019

सुषोमा, त्रिसामा, सुसर्तु, श्वेती, सिंधु, कुभा, गोमती, क्रमू, मेहरु इन अठारह नदियोंका उल्लेख है। ऋग्वेदकी पवित्रतम नदी गंगा नहीं सरस्वती है। महान माता, महान नदी महान देवी भादि कहकर इस नदीका वर्णन किया गया है। पुराणकालमें सरस्वतीका स्थान गंगाने लेलिया । भारतकी सभी नदियोंकी उत्पत्ति कथा है। उसके स्नानका फल कहा गया है। नदी किनारे पर बसे कई गांव, शहर, घाट, मंदिर आदिका वैशिष्ट्य कहा गया है। महाभारतमें अष्टकुल-पर्वतोंसे उद्गम होकर बहनेवाली निम्न लिखी नदियोंका उल्लेख है । हिमाचल पर्वतसे—(१) गंगा (२) सरस्वती (३) सिंधु (४) चंद्रभागा- चिनाब (५) यमुना (६) शुतुद्री-सतलज (७) वितस्ता-झेलम (८) इरावती-रावी (९) कुहू-काबुल (१०) गोमती (११) विपाशा-वियास (१२) देविका-दीग-(१३) शरयू- गोम्रा-(१४) क्षू-रामगंगा-(१५) गंडकी (१६) कौशिका-कोसी-(१७) निश्रा (१८) लोहित्या-ब्रह्मपुत्रा- । (२) परियात्र पर्वत श्रेणीसे—(१) वेदस्मृति-बनास-(२) वेदनती-बेरछ- (३) वृत्रघ्नी-अंनर्गत-(४) सिंधू-कालीसंध-(५) वेण्या, या वर्णाशा, नंदिनी या चंदना- साबरमती-(६) सदानीरा या सतिरापारा-पार्वती-(७) चर्मण्वती या धन्वती-चंबल-(८) तूपी या रूपा या सूर्या-गंभीर-(९) विदिशा-बेस-(१०) वेत्रवती-बेध्वा-(११) क्षिप्रा । (३) ऋक्ष पर्वत श्रेणीसे—(१) मंदाकिनी-(२) दशार्णा-धसान-(३) चित्रकूटा- (४) तमसा-(५) पिप्पलश्रोणी-पैसुनी-(६) पिशाचिक-(७) करमोदा-कर्मनासा-(८) चित्रोत्पला-(९) विपाशा-नेवास-(१०) मंजुला-(११) बालुवाहिनी-बघैन-(१२) सुमेरुजा- सोनरवीरमा-(१३) शुक्तिमती-(१४) शकुला-सक्री-(१५) विदिवा-(१६) क्रमु । (४) विंध्य पर्वत श्रेणीसे—(१) क्षिप्रा-(२) पयोष्णी-(३) निर्विंध्या-नेबुज-(४) तापी-(५) निबन्धा-सिंध-(६) वेणा-वैणगंगा-(७) वैतरी-(८) शितीबाहू-(९) कुमुद्वती- स्वर्णरेखा-(१०) तोया-ब्राह्मणी-(११) महागौरी-दामोदर-(१२) पूर्णा-(१३) शोणसोन- (१४) महानदी-(१५) नर्मदा । (५) सह्याद्रि पर्वत श्रेणीसे—(१) गोदावरी-(२) भीमा-(३) कृष्णा-(४) वेणा-(५) तुंगभद्रा-(६) सुप्रयोगा-हगरी-(७) वरदा-(८) कावेरी-(९) मंजुला । (६) मलय पर्वत श्रेणीसे—(१) कृतमाला-ऋतुमाला-(२) ताम्रपर्णी-(३) पुष्पजा-(४) सत्पलावती-पेरिय । (७) महेंद्र पर्वत श्रेणीसे—(१) पित्रसोमा-(२) ऋषिकुल्या-(३) इक्षुका-(४) त्रिदिवा या वेगवती-(५) लांगुलिनी-(६) वंशकरा । (८) शुक्तिमत पर्वत श्रेणीसे—(१) ऋषिका-(२) कुमारी-सुकतेल-(३) मंदगा- (४) मंदवाहिनी-महानदी-(५) कृपा-(६) पलाशिती-(७) वामन । प्रत्येक प्रदेशमें इसके अतिरिक्त भी अन्य अनेक नदियां हैं। भारतीय साहित्यमें नदियोंके विषयमें जो आदर और श्रद्धा-भक्तिके साथ पावित्र्यका भाव दीखता है वह अपूर्व ही है। व्यासने नदीको "विश्व-माता" कहा तो रवींद्रनाथ ठाकुर : "ईश्वरकी करुणा" कहते हैं। व्याससे रवींद्र- ७६ परिशिष्ट ३ (6)