भारतकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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वस्तुतः यह अकेलेका काम नहीं, सबका काम, सबने मिलकर संपन्न किया । सबने कृतार्थताका अनुभव किया । ऐसी स्थितिमें कौन किसका आभार माने ? मुझे भी इन सबको धन्यवाद देनेका अथवा सबका आभार माननेका क्या अधिकार है ? फिर भी, जब कोई कार्य संपन्न होता है तब उसके कारणीभूत सभी मित्रोंका स्मरण होना स्वाभाविक है। यह केवल कृतज्ञताका स्मरण है ! अपने अपने कर्तव्य किये हुए साथी या सहायकोंको धन्यवाद देनकी उद्धंडता नहीं । हम सब सदैव परस्पर सहयोगसे ऐसे ही सत्कर्म रत रहें, हमारी यह परस्पर मित्रता बढती जाय; हममें प्रेम और विश्वास बढता जाय, परस्पर दायित्व भावना बढती जाय, इसलिये किया गया यह सन्मित्रोंका कृतज्ञता-स्मरण है । एक प्रकारसे यह भी इस सन्मित्र मंडलमें अपनी विशिष्टताका दर्शन कराना है ! इस लिये मैं हृदयसे सबका क्षमा प्रार्थी हूँ । वैसे ही परिशिष्ट लिखनेमें श्री. चित्राव शास्त्रीके चरित्रकोश, श्री. महादेवशास्त्रीजीके सांस्कृतिक कोश आदिका जो उपयोग हुवा इसके लिये भी उन सबका कृतज्ञ हूँ। तथा ज्ञानेश्वरीका अर्थ करनेमें श्री साखरे महाराज, आचार्य श्री. दांडेकर श्री. भिडे आदि सज्जनोंकी ज्ञानेश्वरीका जो उपयोग किया गया उनको भी कृतज्ञतापूर्वक प्रणाम करता हूँ !

बाबूराव कुमठेकर