ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८ सातत्ययोग अर्जुन उवाच किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम । अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥ १ ॥ अर्जुनके सात प्रश्न -- फिर कहा अर्जुनने । जी सुनलिया मैंने । अब जो पूछा मैने । कहो वह ॥ १ ॥ कहो क्या है वह ब्रह्म । किसका नाम है कर्म । अथवा क्या है अध्यात्म । कहो मुझे ॥ २ ॥ प्रभो ! अधिभूत यह है कैसे । औ' अधिदैवत कहते किसे । यह सुनाओ प्रकट रूपसे । जो मैं समझूं ॥ ३ ॥ अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन । प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः ॥ २ ॥ प्रभो अधियज्ञ क्या है । इस देहमें कौन है । समझमें न आता है । अनुमानके भी ॥ ४ ॥ अर्जुनने कहा किसको कहते ब्रह्म तथा अध्यात्म-कर्म क्या । अधिभूत कहो क्या है तथा क्या अधिदैव भी ॥ १ ॥ अधियज्ञ यहां कौन कैसा है इस देहमें । कैसे प्रयाणमें योगी निग्रही जानते तुझे ॥ २ ॥