भारतकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

DevanagariMarathipublished1,172 पृष्ठ

पृष्ठ 34, कुल 1172 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 34

इस महोत्सवके एक ही महिनेमें मार्गशीर्ष वद्य त्रयोदशीको आलंदीके पास सासवडमें श्री सोपानदेवने भी वही शाश्वत सुख पाया। सोपानदेवकी इस मोक्ष-तिथिके पांच महिने बाद वैशाख बद्य द्वादशीको तापी नदीके किनारे पर बिजली कडकी और मुक्ताई खो गयी। स शरीर समाधि। और ठीक एक महिने बाद, वह आदर्श श्रीगुरु निवृत्ति नाथ, अपने शिष्यको तथा उनके शिष्योंको भी, अंतिम स्थान तक मार्गदर्शन करके, वहां पहुंचने तक उनको अपना संरक्षण देकर, आगे आगे लडखडाते चलनेवाले अबोध बालक पर अपनी प्रेम दृष्टिकी छाया करके पीछे चलनेवाली ममता मयी मांके भांति, वे जहांसे आये वहां पहुंचाकर, उन्होंने "ज्यों की त्यों धरि दीन्ही चदरियां" यह देख कर कृतार्थ भावसे, त्र्यंबकेश्वरमें महा-लीन हो गये। तब नामदेवका हृदय अकुलाकर गा उठा अस्त हुवा भानु पढा है अंधार। गये निवृत्तिनाथ योगेश्वर ॥ और विठ्ठलका वह एकाकी सुभट, नामदेव, सारे भारत वर्षमें विठ्ठल-नाम गूंज उठे इस महान संकल्पसे, पंढरपुरसे पंजाब तक, भजन गाते गाते चले और अंतिम क्षणमें पंढरपुरमें आकर सपरिवार विठ्ठल चरणोंमें लीन हो गये ।

८ ज्ञानेश्वर चरित्रके कुछ विवाद प्रश्न- ज्ञानेश्वरके विषयमें इतना लिखनेके बाद उनके जीवनके विषयमें अब तक जो वाद- विवाद चले हैं उसका कुछ उल्लेख करना भी आवश्यक है, नहीं तो वह अधूराही रहेगा। ज्ञानेश्वरके जन्म-स्थानके विषयमें भी महाराष्ट्रके विद्वानोंमें एक वाद है। ज्ञानेश्वरका जन्म कहां हुवा था ? आपेगांव या आलंदी ? कुछ विद्वान लिखते हैं कि “आपेगांवमें ज्ञानेश्वरादि चार बंधुओंका जन्म हुवा" तो कुछ विद्वानोंका मत है कि "इन बंधुओंका जन्म आलंदीमें" हुवा। निवृतीनाथ, ज्ञानेश्वर, सोपानदेव तथा मुक्ताईके साहित्यमें इस विषयमें कुछ भी उल्लेख नहीं है। तथा समकालीन संत नामदेव, जिन्होंने निवृत्ति ज्ञानदेवके विषयमें ही नहीं उनके माता पिताके विषयमें भी बहुत कुछ कहा है; किंतु उसमें कहीं भी इसके विषयमें कुछ भी उल्लेख नहीं है; किंतु विद्वान लोग उस समयकी परिस्थितिका विचार करके "अपने मतसें" निर्णय करते हैं कि "उनका जन्म आपेगांवमें हुवा अथवा आलंदीमें हुवा !" साथ साथ वे समकालीन संत वचनोंका ऐसा आधार लेते हैं कि जनसामान्यको उन्हीका कहना सच लगे ! किंतु आलंदीमें आज भी ज्ञान- देवके नानाके घरकी जगह और उनका जन्म-स्थान दिखाया जाता है। और एक जगह ऐसी दिखाई जाती है कि जहां श्रीविठ्ठलपंतकी झोपडी थी और वे वहां अपने पुत्रपुत्रीके साथ रहते थे। उस स्थानको सिद्धबेट कहा जाता है।

वैसे ही, उनके जन्मस्थानकी तरह जन्म दिनका भी एक वाद है। उनका जन्म दिन (१) निवृत्तिनाथ श. श. १११५ श्रीमुखसंवत्सर, माघवद्य १ सोमवार प्रातः काल (२) ज्ञानदेव शा. श. १११७ युवा संवत्सर श्रावण वद्य ८ गुरुवार मध्यरात्र, (३) सोपानदेव शा. श. १११९ ईश्वर संवत्सर कार्तिक शुद्ध १५ रविवार प्रहर रात्र, (४) मुक्ताई शा. श. १२०१ प्रमाथी संवत्सर आश्विनशुद्ध १ शुक्रवार मध्यान्ह है अथवा (१) निवृत्तिनाथ शा. श. १११० (२) ज्ञानदेव शा. श. १११३ श्रावण व ८ मध्यरात्र. (३) सोपानदेव शा. श. १११६ और (४) मुक्ताई शा. श. १११९ है ! इस विषयमें भी विद्वानोंमें मतभेद है।

ज्ञानेश्वरी २४

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या) · पृष्ठ 34, कुल 1172 में से · BharatKosha