ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंक्रमांक विषय पृष्ठ क्रमांक विषय पृष्ठ ८१ ज्ञानपूर्वक जो स्वधर्माचरण १३ तभी जीवको ब्रह्म-स्वराज नहीं करते उनकी गति १०० मिलेगा १०४ ८२ ज्ञान प्राप्तिका उपाय ६२९ १४ तभी मैं उनको दंड देता हूँ ६६२ ८३ ज्ञान प्राप्तिका साधन १२५ १५ तमप्रधान मृत्युसमय २४५ ८४ ज्ञान प्राप्तिके बाद और १६ तमोगुणके लक्षण ५५६ कुछ पाना नहीं रहता ६२८ १७ तमोगुणीका स्वभावधर्म ५५३ ८५ ज्ञान मनुष्यके हृदयमें होता है ५३४ १८ तामस कर्ताके लक्षण ७६९ ८६ ज्ञानी अहिंसकका चलना ४५० १९ तामस कर्मका लक्षण ७६४ ८७ ज्ञानी अहिंसकका देखना ४५२ ३२० तामसिक आहारका विवेचन ६८३ ८८ ज्ञानी अहिंसकका बोलना ४५१ २१ तामसिक कर्म त्याग ७२५ ८९ ज्ञानी अहिंसककी कार्य प्रणाली ४५३ २२ तामसिक ज्ञानका विवेचन ७५८ २९० ज्ञानीकीबुद्धि इंद्रातीत होती है ७५० २३ तामसिक तप ६९३ ९१ ज्ञानीके अहिंसक मनका स्वरूप ४५४ २४ तामसिक दान ६९७ ९२ ज्ञानी ज्ञानसे मोक्ष पाता है ५७३ २५ तामसिक धृतिके लक्षण ७७७ ९३ ज्ञानी भक्तका महान अनुभव २१३ २६ तामसिक बुद्धिके लक्षण ७७५ ९४ ज्ञानी भक्त सदा सर्वत्र २७ तामसिक यज्ञका विवेचन ६८५ एको भावसे मुझे ही देखता है २६९ २८ तामसिक सुखका विवेचन ७८२ ९५ ज्ञानेश्वरका उपसंहार २४८ २९ तीन प्रकारके कर्मफल ७३१ ९६ ज्ञानेश्वरका देश भाषा प्रेम १५३ ३३० तीन प्रकारके सुखका विवेचन ७७९ ९७ ज्ञानेश्वरका पंथराज १६५ ३१ तीनों गुण, समय समय पर ९८ ज्ञानेश्वरका मातृभाषा प्रेम ३०१ बदलते हैं ५४९ ९९ ज्ञानेश्वरका राष्ट्र-प्रेम ८५६ ३२ तीनों गुणोंका परिणाम ५५५ ३०० ज्ञानेश्वरकी सहज वाक्स्फूर्ति ४८२ ३३ तीसरे पुरुषोत्तमका वर्णन ६१७ १ ज्ञानेश्वर कृत कृष्ण वर्णन १६५ ३४ तुम कौन हो प्रभु ३७६ २ ज्ञानेश्वर महाराजका विनय ६२४ ३५ तू इससे दूर रहकर मेरी ३ ज्ञानेश्वर स्तुति सुमन ८७१ भक्ति कर २९५ ४ ज्ञानेश्वर स्तुति सुमन ८७२ ३६ तू दैवी संपदाका स्वामी है ६४८ ५ ज्ञानेश्वरी ग्रंथके विषयमें ८६२ ३७ तेज २१ ६ ज्ञानेश्वरी ग्रंथ संशोधन वृत्तांत ८७१ ३८ तेन त्यक्तेन शेष प्रसाद सेवन ८७ ७ ज्ञेयका स्वरूप ३३ तेरहवे अध्यायका उपसंहार ५२८ ८ ज्ञेयकी पूर्वपीठिका ५०० ३४ तेरा दर्शन सब कुछ देता है ८४८ ९ तत्कारसे होनेवाले लाभ ७०३ ३५ तेरे तेजसे सारा विश्व ३१० तप ६३४ संतप्त है ३६१ ११ तपका स्वरूप ६८८ ३६ तेरे बिना कुछ भी न होनेसे १२ तब वह न रहनेकासा संदेह भी नहीं रहा ८४९ रहता है ८१४ ३७ तेरे मेरे अनेक जन्म मैं जानता हूं ११० २४ विषय सूचि