ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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करता है संजय ऐसा चिंतन । तथा करता संवादका श्रवण । जिससे उमडकर आता मन । हर्षातिरेकसे ॥ १३ ॥ ऐसा हो वह उत्साहित । अब श्रीकृष्णार्जुनकी बात । कहेगा तो देकर चित्त । सुनियेगा ॥ १४ ॥ उन अक्षरोंका जो है भाव । पहुंचाऊंगा आपके ठांव । कहता सुनिये ज्ञानदेव । निवृत्तिका दास ॥ १५ ॥ गीता श्लोक २७ ज्ञानेश्वरी ओवी ४१५.