ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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सोलहवे अध्यायका ज्ञानेश्वर कृत समालोचन— ऐसे आसुरी भाव संपूर्ण । तथा उसके सब लक्षण । कहे मुक्त होनेके साधन । कृष्णने पार्थसे ॥ ६९ ॥ इस पर वह पुत्र पांडुका । पूछेगा भाव अपने जीवका । सुनो वह सब दे चैतन्यका । कान बनाकर ॥ ४७० ॥ व्यास कृपासे संजय सुनाता । तथा इसे कुरु-नृप सुनता । श्रीगुरु कृपासे मैं सुनाता । इसको यहां ॥ ७१ ॥ आप संत-जन मेरी ओर । कृपा-वर्षा करें यहां पर । मैं आपकी मान्यतानुसार । बनूंगा स्वामी ॥ ७२ ॥ इसीलिये निज अवधान । मुझको देना पसायदान । जिससे बनूं सामर्थ्यवान । कहता ज्ञानदेव ॥ ७३ ॥ गीता श्लोक २४ ज्ञानेश्वरी ओवी ४७३ ॐ ६६९ देवासुर-संपद्विभाग-योग