भारतकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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—:श्रीगुरुका प्रसाद-दान ग्रंथ लेखनका स्थान काल:— ऐसे यह कलियुगमें । है महाराष्ट्रमंडलमें । गोदावरीके किनारेमें । दक्षिणका जो ॥ १ ॥ या त्रिभुवनैक पवित्र । अनादि पंचक्रोश क्षेत्र । जगका जहां जीव-सूत्र । है महालया ॥ २ ॥ वहां यदुवंश विलास । जो सकलकलानिवास । न्यायसे पोसता क्षितीश । श्रीरामचंद्र ॥ ३ ॥ वहां महेशान्वय संभूत । है जो श्रीनिवृत्तनाथ सुत । गाया ज्ञानदेव ये गीत । देशीका भूषण ॥ ४ ॥ एवं श्रीभारतकी गोदमें । प्रसिद्ध भीष्मनाम पर्वमें । श्रीकृष्णार्जुनने वैभवमें । गोष्टि जो की है ॥ ५ ॥ उपनिषदका है सार । सब शास्त्रोंका मातृ-घर । परम-हंस सरोवर । करते सेवन ॥ ६ ॥ उस गीताका यह कलश । संपूर्ण हुवा है अष्टादश । कहता श्रीनिवृत्तिका दास । ज्ञान देव ॥ ७ ॥ पुनः पुनः आगे भी इससे । इस ग्रंथ पुष्प-संपत्तिसे । सर्वभूत सर्वतोमुखसे । होना है संपूर्ण ॥ ८ ॥ श्रीशक बारह शत बारा । टीका बोला यह ज्ञानेश्वर । सच्चिदानंद बाबा सादर । हुवा लिपिक ॥ ९ ॥ ॐ ज्ञानेश्वरी ५७१

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