ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
पृष्ठ 964, कुल 1172 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरिणाम स्वरूप द्रोणाचार्यने अपने शिष्योंसे इसका बदला लिया। इनका आधा राज छीन लिया गया। इससे क्रुद्ध होकर द्रुपद द्रोणके नाशका विचार करने लगा। इसी विचारसे वह पागलसा घूमने लगा। तब अभिचार विद्या-संपन्न, लोभी, अपयाज ब्राह्मणके ऋत्विजत्वमें "द्रोण-शत्रु" पुत्र प्राप्तिके लिये यज्ञ किया। इसी यज्ञके परिणाम स्वरूप धृष्टद्युम्न और द्रौपदीका जन्म हुआ। द्रौपदी जब विवाह-योग्य बनी उसका स्वयंवर किया गया। इस स्वयंवरमें जो जो क्षत्रिय राजा आये थे उनको पांडवोंकी वेषभूषा देख कर ऐसा भ्रम हुवा कि द्रुपदराजने हम सबको अपमानित करके द्रौपदीको ब्राह्मण-कुमारको दे कर विवाहित किया है। इससे युद्धका प्रसंग भी आया। इस समय पांडवोंने अपने शौर्यसे सबका निवारण किया। आगे जब अपने पुरोहितसे पांडव क्षत्रिय होनेका ज्ञात हुवा, इसने बडे ही उत्साह और आनंदसे पांडवोंसे द्रौपदीका विवाह कर दिया। पांडवोंका वनवास और अज्ञातवास समाप्त होनेके बाद द्रुपदराजाने शिष्टाईके लिये अपने पुरोहितको धृतराष्ट्रके पास भेजा था। किंतु संधानका सभी प्रयास विफल होकर जब युद्ध अनिवार्य हुवा तब यह पांडवोंकी ओरसे लडनेके लिये आ गया। यह भी, अपने पुत्र और बंधुजनके साथ युद्धमें आया था। युद्धमें भी इसने खूब ही पराक्रम किया। यह भी जयद्रथ-वधके दिनके रातके युद्धमें, मार्गशीर्ष बद्य एकादशीको, अंतिम प्रहरमें द्रोणाचार्यके हाथसे मारा गया। द्रुपदको द्रौपदी तथा धृष्टद्युम्नके साथ शिखंडी, सुमित्र, प्रियदर्शन, चित्रकेतु, सुकेतु, ध्वजकेतु, धीरकेतु, सुरथ और शत्रुंजय ऐसे पुत्र थे। ये सब युद्धमें मारे गये। और यह वंश संपूर्ण रूपसे नष्ट हो गया। गीता अ० १. श्लो० ५-धृष्टकेतु- चेदिराजा, शिशुपालका लड़का। यह अत्यंत पराक्रमी था। इसके लड़के भी बडे शूर थे। बहुत ही कम लोग युद्ध भूमिमें इससे लड़नेका साहस कर सकते थे। भारत युद्धमें इसने अत्यंत योग्यताके साथ अर्जुनके चक्र-रक्षकका काम किया। यह अपने रथमें कांबोज-देशके घोडे बांधता था। एक बार जब यह द्रोण पर आक्रमण करके आगे बढ़ रहा था वीरधन्वाने इसे रोककर इसका धनुष्य तोड डाला, तब इसने अपना शक्रायुध इतने जोरसे वीरधन्वापर फेंक दिया कि उसके आघातसे वीरधन्वाका रथ चूर चूर हो गया और वीरधन्वा युद्ध-भूमिपर पटक दिया गया। इसके बाद यह अत्यंत वेगके साथ द्रोण पर आक्रमण करके आगे बढ़ा और द्रोणने इसको तत्काल मार गिराया। इसकी एक कन्या रेणुमति नकुलकी पत्नी थी। वीतिहोत्र इसका पुत्र था। गीता अ० १. श्लो० ५-चेकितान- वृष्णिवंशका क्षत्रिय राजा । दुर्योधनने इसका वध किया था। द्रौपदी स्वयंवरमें यह भी गया था। गीता अ० १. श्लो० ५-पुरुजित- कुंतिभोज राजाका पुत्र । कुंतीका भाई । पांडवोंका मामा। इसके रथके घोडे इंद्रधनुष्यके रंगके होते थे। युद्धमें द्रोणाचार्यसे यह मारा गया था। ज्ञानेश्वरी १८