दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)
Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदोहावली १३३ जगत्में सब सीधोंको तंग करते हैं सरल बक्र गति पंच ग्रह चपरि न चितवत काहु । तुलसी सुधे सूर ससि समय बिडंबित राहु ॥३९७॥ भावार्थ—तुलसीदासजी कहते हैं कि सीधी-टेढ़ी (दोनों प्रकार- की) चाल चलनेवाले (मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि-इन) पाँच ग्रहोंमेंसे तो किसीको राहु जल्दी आँख उठाकर देखता भी नहीं। परंतु सीधी चालवाले सूर्य और चन्द्रमाको समयपर वही राहु त्रास देता है (भाव यह कि टेढ़ोंसे सभी डरते हैं और सीधोंको सभी खानेको तैयार रहते हैं) ॥३९७॥ दुष्टनिन्दा खल उपकार बिकार फल तुलसी जान जहान । मेढुक मर्कट बनिक बक कथा सत्य उपखान ॥३९८॥ भावार्थ—तुलसीदासजी कहते हैं कि इस बातको तमाम दुनिया जानती है कि दुष्टोंके साथ उपकार करनेका फल बुरा होता है। सत्योपाख्यान नामक ग्रन्थमें लिखी हुई मेढक, बंदर, वणिक् और बगुलेकी कथाएँ इसके उदाहरण हैं ॥३९८॥ १—एक मेढकने अपने विरोधी कुटुम्बियोंका नाश करानेके लिये एक साँपको बुलाया। उसने सोचा कि साँपको पेटभर भोजन मिलेगा तो वह मेरा उपकार मानेगा और विरोधियोंका नाश हो जायगा। साँपने आकर उसके सब कुटुम्बियोंको खा डाला और फिर उस मेढकको भी खानेके लिये तैयार हो गया। उसने किसी तरह अपनी जान बचायी। २—एक बंदरकी किसी मगरसे दोस्ती थी। बंदर अपने दोस्त मगरको जंगलसे ला-लाकर मीठे फल खिलाया करता था। एक