भारतकोश
दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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दोहावली २१ जैसे वर्षा-ऋतुके श्रावण, भाद्रपद—इन दो महीनोंमें धान लहलहा उठता है, वैसे ही भक्तिपूर्वक श्रीरामनामका जप करनेसे भक्तोंको आत्यन्तिक सुख मिलता है) ॥ २५ ॥ राम नाम नर केसरी कनक कसिपु कलिकाल । जापक जन प्रहलाद जिमि पालिहि दलि सुरसाल ॥२६॥ भावार्थ—श्रीरामनाम नृसिंहभगवान् हैं, कलियुग हिरण्यकशिपु है और श्रीरामनामका जप करनेवाले भक्तजन प्रह्लादजीके समान हैं जिनकी वह (रामनामरूपी नृसिंहभगवान्) देवताओंको दुःख देनेवाले हिरण्यकशिपुको (भक्तिके बाधक कलियुगको) मारकर रक्षा करेगा ॥ २६ ॥ राम नाम कलि कामतरु राम भगति सुरधेनु । सकल सुमंगल मूल जग गुरुपद पंकज रेनु ॥२७॥ भावार्थ—कलियुग में रामनाम मनचाहा फल देनेवाले कल्पवृक्षके समान है, रामभक्ति मुंहमांगी वस्तु देनेवाली कामधेनु है और श्रीसद्गुरुके चरणकमलकी रज संसारमें सब प्रकारके मङ्गलोंकी जड़ है ॥ २७ ॥ राम नाम कलि कामतरु सकल सुमंगल कंद । सुमिरत करतल सिद्धि सब पग पग परमानंद ॥२८॥ भावार्थ—श्रीरामका नाम कलियुगमें कल्पवृक्षके समान है और सब प्रकारके श्रेष्ठ-से-श्रेष्ठ मङ्गलोंका परम सार है। रामनामके स्मरणसे ही सब सिद्धियाँ वैसे ही प्राप्त हो जाती हैं, जैसे कोई चीज हथेलीमें ही रक्खी हो और पद-पदपर परम आनन्दकी प्राप्ति होती है ॥ २८ ॥