भारतकोश
दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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३८ दोहावली भक्तिका स्वरूप प्रीति रामसों नीति पथ चलिय राग रिस जीति। तुलसी संतन के मते इहै भगति की रीति॥८६॥ भावार्थ—तुलसीदासजी कहते हैं कि श्रीरामजीसे प्रेम करना और राग (आसक्ति या काम) एवं क्रोधको जीतकर नीतिके मार्ग- पर चलना, संतोंके मतसे भक्तिकी यही रीति है॥ ८६ ॥ कलियुगसे कौन नहीं छला जाता सत्य बचन मानस बिमल कपट रहित करतूति। तुलसी रघुबर सेवकहि सकै न कलिजुग धूति॥८७॥ भावार्थ—तुलसीदासजी कहते हैं कि जिनके वचन सत्य होते हैं, मन निर्मल होता है और क्रिया कपटरहित होती है, ऐसे श्रीरामजीके भक्तोंको कलियुग कभी धोखा नहीं दे सकता (वे मायामें नहीं फँस सकते) ॥ ८७ ॥ तुलसी सुखी जो राम सों दुखी सो निज करतूति। करम बचन मन ठीक जेहि तेहि न सकै कलि धूति॥८८॥ भावार्थ—तुलसीदासजी कहते हैं कि जो मनुष्य श्रीरामजीसे (भगवान् श्रीरामकी कृपासे ही) अपनेको सब प्रकारसे सुखी होना और (श्रीरामजीको छोड़कर) अपनी अहंकार भरी करतूतोंसे दुखी होना मानता है, जिसके कर्म, वचन और मन ठीक हैं (भगवान्में लगे हैं) उसको कलियुग धोखा नहीं दे सकता ॥ ८८ ॥ गोस्वामीजीकी प्रेम-कामना नातो नाते राम कें राम सनेहँ सनेहु। तुलसी मांगत जोरि कर जनम-जनम सिव देहु ॥८६॥