भारतकोश
दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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दोहावली ४५ तुलसी राम सुदीठि तें निबल होत बलवान । बैर बालि सुग्रीव कें कहा कियो हनुमान ॥११०॥ भावार्थ—तुलसीदासजी कहते हैं कि श्रीरामजीकी शुभ दृष्टिसे निर्बल भी बलवान् हो जाते हैं। सुग्रीव और बालिके बैरमें हनुमान्‌जीने भला क्या किया ? [परंतु वही श्रीरामजीकी कृपासे महान् वीर हो गये] ॥११०॥ तुलसी रामहु तें अधिक राम भगत जियँ जान । रिनिया राजा राम से धनिक भए हनुमान ॥१११॥ भावार्थ—तुलसीदासजी कहते हैं कि श्रीरामके भक्तको रामजीसे भी अधिक समझो। राजराजेश्वर श्रीरामचन्द्रजी स्वयं ऋणी हो गये और उनके भक्त श्रीहनुमान्‌जी उनके साहूकार बन गये (श्रीराम- जीने यहाँतक कह दिया कि मैं तुम्हारा ऋण कभी चुका ही नहीं सकता) ॥१११॥ कियो सुसेवक धरम कपि प्रभु कृतग्य जियँ जानि । जोरि हाथ ठाढ़े भए बरदायक बरदानि ॥११२॥ भावार्थ—श्रीहनुमान्‌जीने [अधिक कुछ नहीं किया, केवल] एक अच्छे सेवकका धर्म ही निभाया। परंतु यह जानकर वर देनेवाले देवताओंके भी वरदाता महेश्वर श्रीभगवान् हृदयसे ऐसे कृतज्ञ हुए कि हाथ जोड़कर हनुमान्‌जीके सामने खड़े हो गये (कहने लगे कि हे हनुमान् ! मैं तुम्हारे बदलेमें उपकार तो क्या करूँ, तुम्हारे सामनै नजर उठाकर देख भी नहीं सकता) ॥११२॥ भगत हेतु भगवान प्रभु राम धरेउ तनु भूप । किए चरित पावन परम प्राकृत नर अनुरूप ॥११३॥ भावार्थ—जगदीश्वर भगवान् श्रीरामजीने भक्तोंके लिये ही