भारतकोश
दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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४६ दोहावली राजाका शरीर धारण किया और साधारण मनुष्योंकी भाँति परम पवित्र लीलाएँ कीं ॥११३॥ ग्यान गिरा गोतीत अज माया मन गुन पार । सोइ सच्चिदानंदघन कर नर चरित उदार ॥११४॥ भावार्थ—जो ज्ञान (बुद्धि), वाणी और इन्द्रियोंसे परे, अजन्मा तथा माया, मन और गुणोंके पार हैं, वही सच्चिदानन्दघन भगवान् श्रेष्ठ नरलीला करते हैं ॥११४॥ हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान । जेहिं मारे सोइ अवतरेउ कृपासिंधु भगवान ॥११५॥ भावार्थ—जिन कृपासिन्धु भगवान्ने भाई हिरण्यकशिपुसहित हिरण्याक्षको और बलवान् मधु-कैटभको मारा था, वे ही भगवान् [श्रीरामरूपमें] अवतरित हुए हैं ॥११५॥ सुद्ध सच्चिदानंदमय कंद भानुकुल केतु । चरित करत नर अनुहरत संसृति सागर सेतु ॥११६॥ भावार्थ—शुद्ध (प्रकृतिजन्य त्रिगुणोंसे रहित, मायातीत दिव्य मङ्गलविग्रह), सच्चिदानन्दकन्दस्वरूप सूर्यकुलके ध्वजारूप भगवान् श्रीरामजी मनुष्योंके समान ऐसे चरित्र करते हैं, जो संसार-सागरसे तारनेके लिये पुलके समान हैं (अर्थात् उन चरित्रोंको गाकर और सुनकर लोग भवसागरसे सहज ही तर जाते हैं) ॥११६॥ भगवान्की बाललीला बाल बिभूषन बसन बर धूरि धूसरित अंग । बालकेलि रघुबर करत बाल बंधु सब संग ॥११७॥ भावार्थ—श्रीरामजी बालोचित सुन्दर गहने-कपड़ोंसे सजे हुए