भारतकोश
दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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हैं; उनके श्रीअङ्ग धूलसे मटमैले हो रहे हैं, सब बालकों तथा भाइयोंके साथ आप बालकोंके-से खेल खेल रहे हैं ॥११७॥ अनुदिन अवध बधावने नित नव मंगल मोद । मुदित मातु पितु लोग लखि रघुबर बाल बिनोद ॥११८॥ भावार्थ—श्रीअयोध्याजीमें रोज बधावे बजते हैं, नित नये-नये मङ्गलाचार और आनन्द मनाये जाते हैं। श्रीरघुनाथजीकी बाललीला देख-देखकर माता, पिता तथा सब लोग बड़े प्रसन्न होते हैं ॥११८॥ राज अजिर राजत रुचिर कोसलपालक बाल । जानु पानि चर चरित बर सगुन सुमंगल माल ॥११९॥ भावार्थ—कोसलपति महाराज दशरथके लाड़ले लाल राजमहल- के सुन्दर आँगनमें हाथों और घुटनोंके बल (बकैयाँ) चलते हुए ऐसी उत्तम-उत्तम लीलाएँ कर रहे हैं जो मानो सब शुभ गुण और सुमङ्गलोंकी माला ही है ॥११९॥ नाम ललित लीला ललित ललित रूप रघुनाथ । ललित बसन भूषन ललित ललित अनुज सिसु साथ ॥१२०॥ भावार्थ—श्रीरघुनाथजीका नाम, उनकी लीला, उनका सुन्दर रूप, उनके वस्त्र, उनके आभूषण सभी अत्यन्त सुन्दर हैं और सुन्दर छोटे भाई तथा अयोध्यावासी बालक उनके साथ [खेल रहे] हैं ॥१२०॥ राम भरत लछिमन ललित सत्रु समन सुख नाम । सुमिरत दसरथ सुवन सब पूजहिं सब मन काम ॥१२१॥ भावार्थ—श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न ऐसे जिनके सुन्दर और शुभ नाम हैं, दशरथजीके इन सब सुपुत्रोंका स्मरण करते ही सारी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं ॥१२१॥