भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( १९ ) और उसी बुद्धिके न होनेसे यह प्राणी धर्म अधर्मका त्याग करता है, इसकारण योगमें बुद्धि लगानी उचित है, निष्काम कर्ममें कुशलता ही योग है ॥ ४९ ॥ धर्माधर्मफले त्यक्त्वा मनीषी विजितेन्द्रियः ॥ जन्मबन्धविनिर्मुक्तः स्थानं संयात्यनामयम् ५० जितेन्द्रिय बुद्धिमान् धर्म और अधर्मके फलको त्यागन करके जन्म बन्धनसे मुक्त होकर अनामय ( ब्रह्मलोक ) को प्राप्त होता है ॥ ५० ॥ यदा ह्यज्ञानकालुष्यं जन्तोर्बुद्धिः क्रमिष्यति ॥ तदासौ याति वैराग्यं वेदवाक्यादिषु क्रमात् ५१ जब इस प्राणीकी बुद्धि मोहरूपी अविद्यासे रहित होगी तब क्रमसे इस प्राणीका श्रवणयोग्य वेदवाक्यादिकोंमें जो फल प्रतिपादन करते हैं उनमें क्रमसे वैराग्य होगा ॥ ५१ ॥ त्रयीविप्रतिपन्नस्य स्थाणुत्वं यास्यते यदा ॥ परात्मन्यचला बुद्धिस्तदासौ योगमाप्नुयात् ५२ जब तीनों वेदोंमें प्रतिपादन किये कर्मसे यह बुद्धि परमा- त्मामें लगकर निश्चल होजाय तब इस प्राणीको योगकी प्राप्ति होती है ॥ ५२ ॥