भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । (२९) भोजन करते हैं, वे सब पापोंसे मुक्त होते हैं, और जो अपने निमित्त भोजन करते हैं, वे पापी मानो पापही भोजन करते हैं ॥ १३ ॥ ऊर्जो भवन्ति भूतानि देवादन्नस्य संभवः ॥ यज्ञाच्च देवसंभूतिस्तदुत्पत्तिश्च वैधतः ॥ १४ ॥ अन्नसे ही प्राणी उत्पन्न होते हैं, और अन्न वर्षासे उत्पन्न होता है और वर्षा यज्ञसे उत्पन्न होती है, और कर्मसे यज्ञकी उत्पत्ति होती है ॥ १४ ॥ ब्रह्मणो वैधमुत्पन्नं मत्तो ब्रह्मसमुद्भवः ॥ अतोयज्ञेचविश्वस्मिन्स्थितं मांविद्धि भूमिप १५ कर्म ब्रह्मसे उत्पन्न होता है, इस कारण हे राजन् ! इस यज्ञमें और विश्वमें स्थित आप मुझे जानिये ॥ १५ ॥ संसृतीनां महाचक्रं क्रामितव्यं विचक्षणैः ॥ स मुदा प्रीणते भूपेन्द्रियक्रीडोऽधमो जनः १६॥ इस आवागमनरूपी संसारचक्रसे बुद्धिमानोंको पार जाना उचित है. हे राजन् ! जो प्राणी अधम है, वह इन्द्रियोंकी क्रीडासे सुख मानते हैं ॥ १६ ॥