भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( ४५ ) फलतृष्णां विहाय स्यात्सदा तृप्तो विसाधनः ॥ उद्युक्तोऽपि क्रियां कर्तुं किंचिन्नैव करोति सः२६ जो फलकी इच्छाको छोड कर सदा तृप्त रहते, और कोई साधन नहीं करते हैं, यदि वे कर्म करनेको उद्यत भी हैं तौभी कुछ नहीं करते हैं ॥ २६ ॥ निरीहो निगृहीतात्मा परित्यक्तपरिग्रहः ॥ केवलं वै गृहं कर्माचरन्नायाति पातकम् ॥ २७॥ जो इच्छा रहित आत्मजित सम्पूर्ण परित्याग किये हैं ऐसे प्राणी यदि घरमें रहकै कर्मभी करें तौभी उन्हें कुछ पातक नहीं लगता ॥ २७ ॥ अद्वन्द्वोऽमत्सरोभूत्वा सिद्ध्यसिद्ध्योः समश्चयः। यथाप्राप्येहं संतुष्टः कुर्वन्कर्म न बद्ध्यते ॥२८॥ द्वंद्व और मत्सरहीन होकर सिद्धि असिद्धिमें समान दृष्टि रखते हैं जो प्राप्तिहो उसीमें संतुष्ट रहते हैं ऐसे प्राणी कर्म करनेसे भी लिप्त नहीं होते हैं ॥ २८ ॥ अखिलैर्विषयैर्मुक्तो ज्ञानविज्ञानवानपि ॥ यज्ञार्थं तस्य सकलं कृतं कर्म विलीयते ॥२९॥