भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 48

भाषाटीकासमेत । ( ४७ ) प्राणानामिंद्रियाणां च परे कर्माणि कृत्स्नशः ॥ निजात्मरतिरूपेऽग्नौ ज्ञानदीप्ते प्रजुह्वति ॥३३॥ और कोई ज्ञानमें जलती हुई आत्मसंयमरूपी योगाग्निमें सम्पूर्ण इंद्रिय कर्म और प्राणोंका हवन करते हैं, अर्थात् इनकी क्रिया आत्मामें लय करदेते हैं ॥ ३३ ॥ द्रव्येण तपसा वापि स्वाध्यायेनापि केचन ॥ तीव्रव्रतेन यतिनो ज्ञानेनापि यजंति माम्॥३४॥ कोई द्रव्ययज्ञका अनुष्ठानकर, दान, तपस्या, कोई स्वाध्या- यसे, कोई महात्मा तीव्र व्रतसे, कोई ज्ञानसे मेरा यजन करते हैं ॥ ३४ ॥ प्राणेऽपानं तथा प्राणमपाने प्रक्षिपंति ये ॥ रुद्ध्वा गतीश्वोभयोस्ते प्राणायामपरायणाः ३५॥ दूसरे कोई पूरकसे, प्राणवायुमें अपानको और रेचकसे प्राणको अपानमें हवन करते हैं, और कुंभकके अनुष्ठानसे प्राणापानकी गतिको रोककर प्राणायाम परायण होते हैं॥३५॥ जित्वा प्राणान्प्राणगतीरुपजुह्वति तेषु च ॥ एवं नानायज्ञरता यज्ञध्वंसितपातकाः ॥ ३६ ॥