भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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भाषाटीकामेत । ( ४९ ) तज्ज्ञेयं पुरुषव्याघ्र प्रश्नेन नतितः सताम् ॥ शुश्रूषया वदिष्यंति संतस्तत्त्वविशारदाः ॥४०॥ हे पुरुषश्रेष्ठ ! उस ज्ञानयज्ञको सत्पुरुषोंकी सेवा और प्रश्नसे प्राप्त करो तत्वजाननेवाले शुश्रूषासे उसको कहेंगे ॥ ४० ॥ नानासंगाञ्जनः कुर्वन्नैकं साधुसमागमम् ॥ करोति तेन संसारे बन्धनं समुपैति सः ॥४१॥ जो मनुष्य अनेक प्रकारकी संगति करताहै पर एक साधुकी संगति नहीं करता,वह संसारमें बंधनको प्राप्त होता है ॥४१॥ सत्संगाद्गुणसंभूतिरापदां लय एव च ॥ स्वहितं प्राप्यते सर्वैरिह लोके परत्र च ॥ ४२ ॥ सत्संगसे गुणकी प्राप्ति, और आपदाका नाश होताहै, इस लोक और परलोकमें अपना कल्याण प्राप्त होता है ॥४२॥ इतरत्सुलभं राजन्सत्सङ्गोऽतीव दुर्लभः ॥ यज्ज्ञात्वा न पुनर्बन्धमेति ज्ञेयं ततस्ततः ॥४३॥ हे राजन् ! और तो सब सुलभ है, परन्तु सत्संग बडा दुर्लभ है, जिसके जाननेसे फिर संसारमें नहीं आता, इस कारण उसका जानना अवश्य है ॥ ४३ ॥

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