भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

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( ५६ ) गणेशगीता-अ० ४. और ऐसा जाननेमें न कोई क्रिया करता हूं, न कोई कर्तृत्व- पना मुझमें है, न मेरा क्रियाके बीजसे कुछ संबंध है, यह सब कुछ शक्ति अर्थात् प्रकृतिसे स्वयं होता रहता है ॥ १३ ॥ कस्यचित्पुण्यपापानि न स्पृशामि विभुर्नृप ॥ ज्ञानमूढा विमुह्यन्ते मोहेनावृतबुद्धयः ॥ १४ ॥ मैं विभु आत्मा किसीके पुण्य और पापोंको स्पर्श नहीं करताहूं, हे राजन् ! मोहसे मलीन बुद्धिवाले ज्ञानके न होनेसे मूर्खही मोहको प्राप्त होते हैं ॥ १४ ॥ विवेकेनात्मनोऽज्ञानं येषां नाशितमात्मना ॥ तेषां विकाशमायाति ज्ञानमादित्यवत्परम् १५॥ जिन्होंने ज्ञानद्वारा आत्मासेही अपना अज्ञान नाश किया है उनका ज्ञान सूर्यकी समान परम प्रकाशित होता है ॥१५॥ मन्निष्ठा मद्धियोऽत्यन्तं मच्चित्ता मयि तत्पराः ॥ अपुनर्भवमायान्ति विज्ञानान्नाशितैनसः ॥ १६ ॥ जिनकी निष्ठा और बुद्धि मुझहीमें है, जिनका चित्त मुझमें अत्यन्त आसक्त है, जो सदा मेरे परायण हैं वह विज्ञानद्वारा पापनाश करके मुक्त होजाते हैं ॥ १६ ॥