भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 87

( ८६ ) गणेशगीता-अ० ८. असंख्य नेत्र, करोडों सूर्यकी किरणोंकी समान प्रकाशीत आयुध धारण किये, इस प्रकार उनके शरीरमें एक स्थानमें राजाने तीनोंलोक देखे ॥ ७ ॥ वरेण्य उवाच । दृष्ट्वैश्र्वरं परं रूपं प्रणम्य स नृपोऽब्रवीत् ॥ वीक्षेऽहं तव देहेऽस्मिन्देवानृषिगणान्पितॄन् ॥८॥ यह ईश्वरसम्बन्धी परम रूप देख प्रणाम करके राजा ( वरेण्य ) बोला-हे भगवन् ! मैं आपके इस देहमें देवता ऋषियोंके गण और पितरोंको देखता हूं ॥ ८ ॥ पातालानां समुद्राणां द्वीपानां चैव भूभृताम् ॥ महर्षीणां सप्तकं च नानार्थैः संकुलं विभो ॥९॥ हे विभो ! सात पाताल, सात समुद्र, सात द्वीप,सात पर्वत, सात ऋषि, यह सब अनेक अर्थोंसे युक्त देखता हूं ॥ ९ ॥ भुवोऽन्तरिक्षं स्वर्गांश्च मनुष्योरगराक्षसान् ॥ ब्रह्मविष्णुमहेशेन्द्रान्देवाअन्तूननेकधा ॥ १० ॥ पृथ्वी, अन्तरिक्ष, स्वर्ग, मनुष्य, सर्प, राक्षस, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, इन्द्र,देवता और भी अनेकप्रकारके जन्तु देखता हूं १०॥