भारतकोश
श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

Ganesha Purana Gita Press Special Edition

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ

पृष्ठ 16, कुल 656 में से

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पृष्ठ 16

[ १४ ] विषय पृष्ठ-संख्या ३८- गृत्समदकी छींकसे एक बालकका जन्म, उसके द्वारा गणेशाराधन, गणेशजीका प्रसन्न होकर त्रैलोक्य-विजयका वरदान और तीन पुर प्रदान करना .................................... ११५ ३९- त्रिपुरासुरका इन्द्रपर आक्रमणकर अमरावतीपुरीपर अधिकार कर लेना .................................................... ११८ ४०- ब्रह्मा, विष्णु और शिवका त्रिपुरासुरके भयसे अपने- अपने लोकोंसे पलायन, देवताओंद्वारा गणेशाराधन, गणेशजीका प्रकट होना, देवताओंद्वारा संकष्टनाशनस्तोत्रसे उनका स्तवन ......................................................... १२० ४१- श्रीगणेशजीका कलाधर विप्रके रूपमें त्रिपुरासुरके पास आना और उसे स्वर्ण, रजत एवं लौहसे निर्मित तीन पुर प्रदान करना ........................................................... १२४ ४२- भगवान् शंकर और त्रिपुरासुरका युद्ध ............................. १२५ ४३- त्रिपुरासुरके साथ युद्धमें भगवान् शंकरकी पराजय ...... १२७ ४४- नारदजीके निर्देशसे भगवान् शंकरका तप करके गणेशजीको प्रसन्न करना ............................................. १२९ ४५- शिवकृत गणपति स्तुति ............................................. १३१ ४६- श्रीगणेशसहस्रनामस्तोत्र ............................................. १३३ ४७- त्रिपुरदाह एवं त्रिपुरासुरका वध .................................... १४७ ४८- त्रिपुर-विजयके उपलक्ष्यमें देवताओंद्वारा त्रिपुरारि-महोत्सव (देव-दीपावली)-का आयोजन, हिमवान्का पार्वतीको गणेशजीकी महिमा बताना ........................................ १६० ४९- श्रीगणेशजीकी पार्थिव-पूजाकी विधि ........................... १६२ ५०- श्रीगणेशजीके मन्त्रोंके अनुष्ठान एवं गणेशचतुर्थीव्रतकी विधि ..................................................................... १६८ ५१- गणेशचतुर्थीव्रतानुष्ठानविधिके वर्णनके प्रसंगमें राजा कर्दमके पूर्वजन्मकी कथा .......................................... १६९ ५२- राजा नलके पूर्वजन्मका वृत्तान्त ................................. १७४ ५३- हिमवान्-पार्वती-संवादमें राजा चंद्रांगदका उपाख्यान ..... १७६ ५४- प्रजाजनोंको आश्वासन देना, रानी इंदुमतीका राजाको मृत समझकर विलाप करना तथा नारदजीके उपदेशसे गणेशचतुर्थीका व्रत करना ......................................... १७८ ५५- गणेशचतुर्थीव्रतके माहात्म्यके सन्दर्भमें राजा चंद्रांगद और रानी इंदुमतीके पुनर्मिलनकी कथा ......................... १८० ५६- गणपत्युपासनाकी महिमाके सन्दर्भमें भृशुण्डीमुनिका आख्यान ............................................................... १८२ ५७- भृशुण्डीमुनिका प्रारम्भिक जीवन, मुद्गलमुनिकी उनपर कृपा, उनकी कठोर तपस्या तथा उन्हें गणेश-सारूप्यकी प्राप्ति ..................................................................... १८४ ५८- संकष्टचतुर्थीव्रतकी महिमाके प्रसंगमें भृशुण्डीमुनिके पितरोंके उद्धारकी कथा .......................................... १८७ ५९- कृतवीर्यके पूर्वजन्मकी कथा, संकष्टचतुर्थीव्रतकी विधि और उसकी महिमा ................................................. १८८ ६०- भूमिपुत्र मंगलकी उत्पत्तिकी कथा, उसकी उग्र तपस्यासे गणेशजीका प्रसन्न होकर वर देना, अंगारकचतुर्थीव्रतकी महिमा ................................................................... १९० विषय पृष्ठ-संख्या ६१- गणेशजीद्वारा चन्द्रमाको शाप देना तथा देवताओंकी प्रार्थनापर पुनः अनुग्रह करना, चन्द्रमाद्वारा वरद विनायककी स्थापना... १९३ ६२- भाद्र शुक्ल चतुर्थीव्रतके अन्तर्गत गणेशजीको दूर्वार्पणके माहात्म्यका वर्णन .................................................... १९६ ६३- गणेश-पूजनमें दूर्वांकुरके माहात्म्यके प्रसंगमें अनलासुरके आतंकका वर्णन ...................................................... १९८ ६४- गणेशपूजनमें दूर्वांकुरके माहात्म्यके प्रसंगमें अनलासुरके शमनकी कथा ........................................................ २०० ६५- गणेशजीद्वारा राजा जनकके दानशीलताजनित अभिमानका मर्दन .................................................................... २०२ ६६- कुष्ठी ब्राह्मणके वेशमें गणेशजीका अपने भक्त द्विज- दम्पतीके यहाँ जाना और उनके द्वारा भक्तिपूर्वक प्रदत्त दूर्वांकुरमात्रसे तृप्त होना .......................................... २०४ ६७- दूर्वांकुरकी महिमाके प्रति संशयग्रस्त आश्रयाको कौण्डिन्यमुनिका इन्द्रके पास दूर्वांकुरके भारके बराबर स्वर्ण लानेके लिये भेजना और एक दूर्वांकुरपर त्रैलोक्यकी सम्पदाका भी न्यून होना ......................................... २०६ ६८- कृतवीर्यके पिताका कृतवीर्यको स्वप्नमें दर्शन देना और उसे संकष्टचतुर्थीव्रतकी पुस्तक देना ........................... २०९ ६९- देवराज इन्द्रका राजा शूरसेनसे संकष्टचतुर्थीव्रतकी विधिका निरूपण करना ....................................................... २११ ७०- संकष्टचतुर्थीव्रतकी महिमा ......................................... २१६ ७१- संकष्टचतुर्थीव्रतके उद्यापनकी विधि, संकष्टचतुर्थीव्रतके अनुष्ठानसे राजा कृतवीर्यको पुत्रप्राप्ति .......................... २१७ ७२- कृतवीर्यकी पत्नीका अंगहीन पुत्रको जन्म० देना, दत्तात्रेयजीका आना और कृतवीर्यपुत्रको गणेशजीके एकाक्षरमन्त्रका उपदेश देना, कृतवीर्यका पुत्रको गणपति- आराधनाके लिये वनमें भेजना ................................... २१९ ७३- गणेशजीकी आराधनाके प्रभावसे कार्तवीर्यको दिव्य देह और सहस्र भुजाओंकी प्राप्ति .................................... २२१ ७४- संकष्टचतुर्थीव्रतकी महिमाके सन्दर्भमें एक गलत्कुष्ठा चाण्डालीकी कथा .................................................. २२२ ७५- राजा शूरसेनका संकष्टचतुर्थीव्रत करना और उसके प्रभावसे सम्पूर्ण प्रजासहित उनको ले जानेके लिये गणेशलोकसे विमान आना .......................................................... २२४ ७६- श्रीगणेशजीके चार अक्षरवाले 'गजानन' नाम-मन्त्रके माहात्म्यमें ब्राह्मण-पुत्र बुधका आख्यान, शापवश वैश्यकुलमें उत्पन्न बुधका कुष्ठी होना और 'गजानन' नाम-मन्त्रके श्रवणसे उसे विनायकधामकी प्राप्ति ...... २२६ ७७- श्रीपरशुरामजीके आविर्भावके प्रसंगमें महर्षि जमदग्निका आख्यान, कार्तवीर्यार्जुनका महर्षि जमदग्निके आश्रममें आना और महर्षिद्वारा कामधेनुके प्रभावसे ससैन्य राजाका सत्कार करना ........................................................ २३० ७८- मुनि जमदग्निद्वारा ससैन्य राजा कार्तवीर्यका आतिथ्य; कामधेनुका अद्भुत प्रभाव देखकर राजाका बलपूर्वक उसे ग्रहण करनेकी इच्छा करना ................................. २३३ Kalyana Visheshank 2021_Section_2_2_Back

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