श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)
Ganesha Purana Gita Press Special Edition
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ
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| ७९- जमदग्निद्वारा कामधेनुको देनेसे मना करनेपर कार्तवीर्यका क्रुद्ध होकर अपने सैनिकोंको युद्धका आदेश देना, इधर कामधेनुद्वारा अनेक वीरोंका प्रादुर्भाव और उनके द्वारा कार्तवीर्यकी सेनाका पराभव, क्रुद्ध कार्तवीर्यद्वारा महर्षि जमदग्निका वध, रेणुकाका कार्तवीर्यको शाप देना .... | २३५ | शिवकी प्रार्थना, प्रसन्न होकर शिवद्वारा उसे अनेक वरदानोंकी प्राप्ति तथा कामदेवके सदेह होनेका वरदान दिया जाना, कामदेवद्वारा गणेशजीके एकाक्षर मन्त्रका अनुष्ठान तथा गणेशजीकी आराधना...................... | २५६ |
| ८०- माता रेणुकाके स्मरण करनेपर परशुरामका आगमन, माताद्वारा सारा वृत्तान्त जानकर परशुरामका दुखी होना और माताद्वारा प्राप्त इक्कीस बार पृथ्वीको क्षत्रियविहीन बनानेकी आज्ञाको स्वीकार करना, परशुरामद्वारा माता-पिताका और्ध्वदैहिक संस्कार करना .................... | २३८ | ८९- गणेशजीद्वारा कामदेवको अनेक वरोंकी प्राप्ति, कामदेवद्वारा गणेशके महोत्कट स्वरूपकी आराधना, कामदेवका रुक्मिणीके गर्भसे प्रद्युम्नके रूपमें जन्म, शम्बरासुरद्वारा उस बालकका हरण, गणेशजीके कृपाप्रसादसे प्रद्युम्नद्वारा शम्बरासुरका वध और द्वारकापुरीको प्रस्थान, शंकरजीका शेषनागके दर्पको भंग करना ............................ | २५९ |
| ८१- परशुरामका माता-पिताका दाह-संस्कार करके महर्षि दत्तात्रेयजीको आमन्त्रित करने उनके आश्रमपर जाना और अपने आगमनका प्रयोजन बताना, तदनन्तर दोनोंका वापस आश्रमपर आना, दत्तात्रेयजीके निर्देशानुसार परशुरामद्वारा त्रयोदशाहपर्यन्त अपने माता-पिताका और्ध्वदैहिक संस्कार सम्पन्न करना और पिता-माताकी सद्गति ............. | २३९ | ९०- देवर्षि नारदजीका शेषनागको गणेशोपासनाकी दीक्षा देना, शेषनागद्वारा षडक्षर मन्त्रका अनुष्ठान, प्रसन्न होकर गणेशजीका उन्हें दिव्यरूपमें दर्शन देना, शेषनागद्वारा गणेश-स्तवन और अनेक वरोंकी प्राप्ति, गणेशजीकी कृपासे शेषनागका सहस्र सिरवाला होना, शेषनागका धरणीधर नामसे गणेश-प्रतिमाकी प्रतिष्ठा करना ...... | २६२ |
| ८२- परशुरामजीद्वारा पूछे जानेपर माता रेणुकाद्वारा कार्तवीर्य-विजयका उपाय बतलाना, परशुरामद्वारा महादेवजीकी आराधनासे उन्हें गणेशजीके षडक्षरमन्त्रका उपदेश प्राप्त होना, मन्त्रजपसे गणेशजीका उन्हें दर्शन देना, गणेशजीका उन्हें अपना परशु प्रदान करना और परशुराम नामकी प्रसिद्धि, परशुरामद्वारा कार्तवीर्यका वध तथा इक्कीस बार पृथिवीको क्षत्रियविहीन बनाना .......................... | २४१ | ९१- गणेशजीकी आज्ञासे ब्रह्माजीद्वारा सात मानस पुत्रोंकी सृष्टि, ब्रह्मपुत्र कश्यपद्वारा गणेशजीकी आराधना और विविध वरोंकी प्राप्ति, कश्यपपत्नियोंसे सृष्टिका विस्तार, कश्यपपुत्रोंद्वारा गणेशजीकी स्तुति ...................... | २६५ |
| ८३- तारकासुरका आख्यान, ब्रह्माजीसे वरप्राप्त तारकासुरका अत्याचार, देवोंद्वारा भगवान् शिवकी स्तुति, भगवती उमाका प्रकट होकर तारकासुरके वधका उपाय बताना, देवताओंद्वारा कामदेवका आवाहन, कामदेवका शिवको विचलित करनेके लिये प्रस्थान ..................................... | २४४ | ९२- देवताओंको गणेशजीसे अनेक वरदानोंकी प्राप्ति, देवताओं आदिद्वारा गणेशजीकी द्वादश मूर्तियोंकी स्थापना, गणेशजीके सुमुख आदि द्वादश नामोंके स्मरणका माहात्म्य, उपासनाखण्डके श्रवणकी महिमा तथा उपासनाखण्डका उपसंहार .................................................... | २६८ |
| ८४- कामदेवद्वारा समाधिस्थ भगवान् शंकरको विचलित करना, उनकी नेत्राग्निसे कामका दग्ध होना, पार्वतीद्वारा शंकरकी स्तुति तथा शिव-पार्वतीका कैलासगमन ............... | २४७ | श्रीगणेशपुराण — [ उत्तरार्ध ]<br>क्रीडा-खण्ड<br>१- देवान्तक और नरान्तकका जन्म तथा नारदजीका उन्हें पंचाक्षरी महाविद्याका उपदेश देना ...................... | २७१ |
| ८५- भगवान् शिव-पार्वतीका क्रीडा-विहार, देवताओंकी प्रार्थनापर अग्निदेवका भिक्षुकरूपमें उनके समीप जाकर भिक्षाकी याचना करना, माता पार्वतीका भिक्षाके रूपमें उन्हें शिवतेज प्रदान करना, अग्निदेवद्वारा उस तेजको गंगामें प्रवाहित करना, छः कृत्तिकाओंद्वारा शिवतेजका धारण और षण्मुखका प्रादुर्भाव ................................. | २४८ | २- देवान्तक और नरान्तककी तपस्यासे प्रसन्न होकर शिवका प्रकट होना और उन्हें वरदान देना ..................... | २७३ |
| ३- देवान्तककी देवलोकपर विजय ......................... | २७५ | ||
| ४- नरान्तककी भूलोक और नागलोकपर विजय ............ | २७८ | ||
| ८६- ब्रह्मा तथा बृहस्पतिद्वारा स्कन्दका नामकरण, देवताओंद्वारा स्कन्दका 'सेनापति' पदपर अभिषेक, स्कन्दका वरद-चतुर्थीके माहात्म्यके विषयमें शिवजीसे प्रश्न करना ... | २५१ | ५- अदितिकी तपस्यासे प्रसन्न गणेशजीका उनके पुत्ररूपमें जन्म ग्रहण करनेकी स्वीकृति देना ...................... | २७९ |
| ८७- वरदचतुर्थीव्रतका विधान, शिवजीके उपदेशसे स्कन्दद्वारा वरदचतुर्थीव्रतका प्रत्यक्ष अनुष्ठान, कार्तिकेयको लक्ष्य-विनायक गणेशजीके दिव्य स्वरूपका दर्शन और अनेक वरदानोंकी प्राप्ति, कार्तिकेयद्वारा लक्ष्य-विनायक गणेशकी प्रतिमाकी स्थापना और तारकासुरका वध .............. | २५३ | ६- दैत्योंके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीके पास जाकर अपनी व्यथा बताना, ब्रह्मादि देवताओंद्वारा परमात्मा गणेशसे अवतार धारण करनेकी प्रार्थना करना, देवी अदिति और कश्यपके पुत्ररूपमें गणेशजीका अवतरण, कश्यपद्वारा उनके जातकर्मादि संस्कार करना और 'महोत्कट' यह नाम रखना .............................. | २८१ |
| ८८- कामदेवके दग्ध किये जानेपर कामपत्नी रतिद्वारा भगवान् | ७- वसिष्ठ आदि ऋषियोंका बालक महोत्कटका दर्शन करनेके लिये कश्यपजीके आश्रममें आना, विरजा राक्षसीद्वारा बालक महोत्कटका अपहरण, बालकका विरजा राक्षसीका उद्धारकर अपने धाम भेजना, कश्यपद्वारा अदितिको बालककी रक्षा करते रहनेका आदेश देना .............. | २८४ |