श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)
Ganesha Purana Gita Press Special Edition
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 18, कुल 656 में से
संदर्भ में पढ़ें[ १६ ] विषय | पृष्ठ-संख्या ८- गणेशजीकी बाललीलाके सन्दर्भमें उद्धत तथा धुन्धुर नामक दैत्योंके वधकी कथा और चित्र नामक गन्धर्वके उद्धारका आख्यान ............................................... २८६ ९- हाहा-हूहू तथा तुम्बुरु नामक गन्धर्वोंका कश्यपमुनिके आश्रममें आना, गन्धर्वोंद्वारा पंच-देवोंका पूजन, बालक गणेशद्वारा लीलापूर्वक पंचदेवोंकी मूर्तियोंको अदृश्य कर देना, माताको अपने मुखमें समस्त ब्रह्माण्डको प्रतिष्ठित दिखाना तथा गन्धर्वोंको विश्वात्मारूप दिखाकर उनके भ्रमको निवारित करना, गन्धर्वोंद्वारा गणेश-स्तवन .... २८८ १०- बालक गणेशद्वारा विघातादि राक्षसोंका उद्धार, बालक गणेशके यज्ञोपवीत-संस्कारका वर्णन, विविध देवोंद्वारा उन्हें अनेक नाम तथा विविध उपहार प्रदान करना ..... २९० ११- महर्षि कश्यपजीद्वारा इन्द्रको बालक गणेशके अद्भुत कर्मोंको बताना, इन्द्रकी आज्ञासे वायु तथा अग्निद्वारा बालक गणेशकी परीक्षा, गणेशका विराट् रूप धारणकर इन्द्रको दिखाना, इन्द्रका भयभीत होकर उनकी स्तुति करना, इन्द्रकृत स्तुतिका माहात्म्य ......................... २९२ १२- काशीनरेशका मुनि कश्यपके आश्रममें आगमन और अपने पुत्रका विवाह सम्पादित करवानेकी प्रार्थना करना, मुनि कश्यपद्वारा बालक विनायकको काशिराजके साथ भेजना, मार्गमें विनायकद्वारा धूम्राक्ष राक्षसका वध एवं उसके दोनों पुत्रोंको उड़ाकर नरान्तकके पास भेजना, नरान्तकका दूतोंको युद्धका आदेश, विनायकद्वारा निशाचरोंका वध ................................................ २९५ १३- दूतोंका अपने राजा नरान्तकसे बालक विनायकके पराक्रमका वर्णन करना, काशिराजसहित बालक विनायकका काशीनगरीमें प्रवेश, काशीवासियोंको विविध रूपोंमें विनायकका दर्शन, बालक विनायकके वधकी दृष्टिसे वहाँ आये विघण्ट तथा दन्तुर आदि अनेक राक्षसोंका वध, काशिराजद्वारा विनायकका पूजन तथा सत्कार ... २९८ १४- धर्मदत्त नामक ब्राह्मणका काशिराजके यहाँ आना और विनायककी स्तुति करना, विनायकका धर्मदत्तके साथ उनके घरको प्रस्थान, मार्गमें आये काम-क्रोध नामक राक्षसोंका विनायकद्वारा वध, विनायककी बाललीलाके प्रसंगमें मदोन्मत्त हाथीका वध, धर्मदत्तद्वारा सिद्धि तथा बुद्धि नामक दो कन्याओंको विनायकको सौंपना, विनायकद्वारा जृम्भा राक्षसीका वध, विनायकके बालचरितके श्रवणकी महिमा ............................... ३०१ १५- काशीनरेशद्वारा अपनी सभामें विनायकके अद्भुत कर्मोंका वर्णन, ज्वालामुख, व्याघ्रमुख तथा दारुण नामक राक्षसोंका काशीपुरीको दग्ध करना, बालक विनायकके द्वारा तीनों असुरोंका वध तथा काशीपुरीको पूर्ववत् बना देना और राजाद्वारा विनायककी स्तुति ................................ ३०४ १६- काशिराजका दण्डकारण्यमें महर्षि भृशुण्डीके आश्रममें गमन, काशिराज तथा गजाननके अनन्य भक्त भृशुण्डीका वार्तालाप ........................................................... ३०७ विषय | पृष्ठ-संख्या १७- काशिराज तथा गजाननभक्त मुनि भृशुण्डीको विनायकद्वारा अपने यथार्थ स्वरूपका दर्शन कराना, विनायकके 'आशापूरक' नामकी प्रसिद्धि .............................. ३०९ १८- बालक विनायकके बालचरितके वर्णन-प्रसंगमें एक दैत्यका ज्योतिषी बनकर काशिराजके दरबारमें आना और विनायकद्वारा उसका वध .................................... ३१२ १९- विनायककी बाललीलाके प्रसंगमें दैत्य नरान्तकद्वारा दो दैत्यों कूप तथा कन्दरको काशीनगरीमें भेजना, कूपका कुआँ और मेढक बनकर तथा कन्दरका बालक बनकर विनायकको मारनेका प्रयत्न करना, विनायकद्वारा लीलापूर्वक दोनोंका परस्पर वध कराना ................................ ३१५ २०- बालक विनायककी बाललीलाके सन्दर्भमें विनायकद्वारा अन्धासुर आदि तीन दैत्योंके वधका वर्णन ............ ३१७ २१- भ्रमरा राक्षसीका अदितिका रूप धारणकर बालक विनायकके पास आना, बालक विनायकद्वारा उसका वध, देवताओं आदिके द्वारा विनायककी स्तुति .............. ३२० २२- काशीनगरीके निवासियों तथा शुक्ल नामक ब्राह्मणद्वारा विनायकको अपने-अपने घर ले जानेके लिये राजासे प्रार्थना करना और स्वीकृति प्राप्तकर विनायकके स्वागतकी तैयारी करना ..................................................... ३२४ २३- कुमार सनक तथा सनन्दनका बालक विनायकके दर्शनके लिये काशीनरेशकी सभामें आना, बालक विनायकका शुक्ल नामक ब्राह्मणके घरमें उसका आतिथ्य स्वीकार करने जाना तथा शुक्ल-दम्पतीको विविध वरोंकी प्राप्ति .................................................... ३२६ २४- काशीनगरीमें विनायकके द्वारा एक ही समयमें अनेक घरोंमें भोजनादि सम्पन्न करना तथा सनक-सनन्दनको अपने विविध स्वरूपोंका दर्शन कराकर विवेकज्ञानकी प्राप्ति कराना ..................................................... ३२९ २५- कुमार सनक तथा सनन्दनद्वारा की गयी विनायक-स्तुति, उनके द्वारा काशीमें गणेशकुण्डका निर्माण तथा मन्दिर बनाकर उसमें वरदविनायक नामक विनायक-मूर्तिकी प्रतिष्ठा, भक्तिकी महिमा .................................... ३३२ २६- व्याध तथा राक्षसद्वारा अनजानेमें ही गणेशजीके ऊपर शमीपत्रके गिर जानेसे प्रसन्न विनायकद्वारा उन दोनोंको अपने लोककी प्राप्ति कराना................................... ३३३ २७- भीम नामक व्याध और राक्षसके पूर्वजन्मका वृत्तान्त ............................................................ ३३५ २८- राजा साम्ब तथा दुष्टबुद्धिके जन्म-जन्मान्तरोंकी कथा, उनके द्वारा अनजानेमें किये गये शमीपत्रके पूजनसे गजाननका प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य देह प्राप्त कराकर स्वर्गलोक प्राप्त कराना ........................................ ३३६ २९- महर्षि कश्यपकी पत्नी दिति तथा अदितिके वंशका वर्णन, हिरण्याक्ष तथा हिरण्यकशिपुकी उत्पत्तिका वर्णन, उनकी तपस्या तथा उन्हें वरदानकी प्राप्ति, प्रह्लादपुत्र विरोचनके वधका आख्यान ............................................... ३३८