श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)
Ganesha Purana Gita Press Special Edition
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 253, कुल 656 में से
संदर्भ में पढ़ेंउ०ख०-अ०८६ ] * ब्रह्मा तथा बृहस्पतिद्वारा स्कन्दका नामकरण * २५१ 卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐 और उन्होंने भगवान् शंकर तथा देवी पार्वतीको सम्पूर्ण | वह गंगाजीके तटपर पड़ा हुआ है, क्या आपने वृत्तान्त बतलाया ॥ ४२ ॥ | उस षण्मुख बालकका परित्याग कर दिया है। वह उस बालकको भगवान् शिवका पुत्र जानकर | करोड़ों कामदेवोंकी शोभासे समन्वित है, और अपनी सम्पूर्ण पृथिवी आनन्दित हो उठी। देवता दुन्दुभियाँ | गर्जनासे सम्पूर्ण लोकोंको क्षुब्ध कर रहा है। हे बजाने लगे और गन्धर्व अद्भुत गान करने लगे ॥ ४३ ॥ | गौरि ! उस सुन्दर बालकके प्रति आपने निष्ठुरता क्यों नारदजी बोले- हे देवि पार्वती ! मैंने यहाँ आते | की है ? ॥ ४५ १/२ ॥ समय मार्गमें तुम्हारे पुत्रको देखा है। उसके छः मुख हैं, | ब्रह्माजी बोले- इस प्रकार कहनेके अनन्तर उन बारह भुजाएँ हैं और वह करोड़ों सूर्योंके समान | देवर्षि नारदजीके अन्तर्धान हो जानेपर वे देवी गौरी उस आभावाला है ॥ ४४ ॥ | बालकके समीप गयीं ॥ ४६ ॥ ॥ इस प्रकार श्रीगणेशपुराणके अन्तर्गत उपासनाखण्डमें 'स्कन्दोपाख्यान' नामक पचासीवाँ अध्याय पूर्ण हुआ ॥ ८५ ॥ छियासीवाँ अध्याय ब्रह्मा तथा बृहस्पतिद्वारा स्कन्दका नामकरण, देवताओंद्वारा स्कन्दका 'सेनापति' पदपर अभिषेक, स्कन्दका वरदचतुर्थीके माहात्म्यके विषयमें शिवजीसे प्रश्न करना ब्रह्माजी बोले-उस प्रकारके बालकको देखकर | उसका नामकरण संस्कार करनेके लिये भगवान् देवी पार्वतीके स्तनोंसे दूध टपकने लगा। देवी सतीने | शिवने ब्रह्माजी और देवगुरु बृहस्पतिको बुलाकर उन प्रसन्नतापूर्वक बालकका आलिंगन किया, उस समय | दोनोंसे कहा कि 'आप लोग इस बालकका नाम रखें' ॥ ७ ॥ बालक उनके हृदयदेशमें स्थित था। उसी समय गम्भीर | ब्रह्मा तथा बृहस्पति बोले- हे भगवन् ! चूँकि स्वरवाली देवी गंगाने उनसे कहा कि 'यह बालक मेरा | यह बालक कार्तिकमासमें उत्पन्न हुआ है, इसलिये है', अग्निदेवने उपस्थित होकर उन गिरिकन्या पार्वतीसे | इसका 'कार्तिकेय' यह प्रथम नाम विख्यात होगा। कहा- 'यह मेरा पुत्र है' ॥ १-२ ॥ | इसका अन्य दूसरा नाम 'पार्वतीनन्दन' भी होगा। इसका कृत्तिका आदि छः स्त्रियोंने उनसे कहा कि 'यह | जन्म शरकण्डोंमें हुआ है, अतः यह 'शरजन्मा' भी बालक हमसे उत्पन्न हुआ है', रोते हुए व्याकुल होकर | कहलायेगा। कृत्तिकाओंसे उत्पन्न होनेसे भी यह 'कार्तिकेय' वे स्त्रियाँ कहने लगीं-'यह बालक हमारा ही है' ॥ ३ ॥ | इस नामसे प्रसिद्ध होगा ॥ ८-९ ॥ इस प्रकार विवाद करती हुई वे स्त्रियाँ अग्निदेवको आगे | चूँकि [कृत्तिका आदि] इसकी छः माताएँ हैं, करके देवताओंके निवास-स्थल कैलासपर्वतपर चन्द्रमाको | इसलिये 'षाण्मातुर' भी इसका नाम होगा। आपका यह शिरपर धारण करनेवाले भगवान् शिवके पास गयीं ॥ ४ ॥ | पुत्र दैत्य तारकपर विजय प्राप्त करेगा, इसलिये यह उन सबसे भी पहले देवी पार्वती वहाँ पहुँचीं, वे | 'तारकजित्' नामसे भी प्रसिद्ध होगा ॥ १० ॥ अपनी गोदमें अपने उस बालकको लिये हुए थीं। भगवान् | यह भविष्यमें देवोंकी सेनाका पति होगा, इसलिये शिवने उस बालकको अपनी गोदमें धारण करके मन्त्रोच्चार- | 'सेनानी' नामसे भी इसे पुकारा जायगा। सेनापति पूर्वक उसके सिरको सूँघा और वे भगवान् त्रिलोचन उस | होनेके कारण यह 'महासेन' कहलायेगा। इसके छः बालकके साथ बड़ी प्रसन्नतापूर्वक क्रीडा करने लगे। देवी | मुख होनेसे यह 'षडानन' भी कहा जायगा। चूँकि गंगा, अग्निदेव और वे कृत्तिका आदि छहों स्त्रियाँ जैसे | भगवान् शिवका रेत तीन बार स्खलित हुआ, इसलिये आयी थीं, वैसे ही अपने घरोंको चली गयीं ॥ ५-६ ॥ | यह 'स्कन्द' कहा जायगा। ब्रह्मा और बृहस्पतिके