भारतकोश
श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

Ganesha Purana Gita Press Special Edition

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ

पृष्ठ 269, कुल 656 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 269

उ०ख०-अ०९१ ] * गणेशजीकी आज्ञासे ब्रह्माजीद्वारा सात मानस पुत्रोंकी सृष्टि * २६७ 卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐 भक्ति-निष्ठापूर्वक देवेश्वर गजाननका स्मरण करते रहते थे। दिव्य हजार वर्षोंके बीत जानेपर अनेक रूप धारण करनेवाले, करुणानिधान भगवान् गजानन उन (कश्यपपुत्रों)-के समक्ष प्रकट हुए ॥ ३७-३८ ॥ गणेशजीके जैसे रूपका जिन्होंने ध्यान किया था, उनके समक्ष वे उसी रूपको धारणकर प्रकट हुए, किसीके समक्ष वे मेघके समान आभावाले होकर आठ विशाल भुजाओंको धारण किये हुए प्रकट हुए ॥ ३९ ॥ किसीके समक्ष चन्द्रमाके समान कान्तिसे सम्पन्न होकर चार भुजाओंवाले स्वरूपमें वे आविर्भूत हुए, किसीके आगे रक्तवर्णकी आभासे सम्पन्न होकर वे गणेश्वर छः भुजाओंवाले स्वरूपमें प्रकट हुए ॥ ४० ॥ किसीको हजार नेत्रों तथा हजार भुजाओंसे समन्वित रूपमें वे अपने सामने दिखायी दिये, किसीके सामने बालकके रूपमें, किसीके सामने युवावस्थावाले तथा किसीको वृद्धके रूपमें भी वे आभासित हो रहे थे ॥ ४१ ॥ वे गजानन किसीके सामने दस भुजाओंवाले, किसीके सामने बारह भुजाओंवाले, किसीके सामने धूम्रवर्णके तो किसीके सामने महान् प्रकाशसे समन्वित रूपमें दिखलायी पड़े। किसीके सामने वे अठारह भुजाओंको धारण किये हुए प्रकट हुए और किसीने करोड़ों सूर्योंकी प्रभासे सम्पन्न उनके स्वरूपका दर्शन किया। वे अत्यन्त तेजसे सम्पन्न तथा विशाल विग्रहवाले थे। कभी वे मूषककी पीठपर सवार दिखायी देते थे, तो कभी सिंहके ऊपर और कभी मयूरवाहनके रूपमें दृश्यमान होते थे। वे कभी हाथीके मुखवाले दीखते थे तो कभी अनेक मुखोंवाले हो जाते थे ॥ ४२-४३ ॥ उन देव गणेशजीका दर्शनकर वे सभी बड़े प्रसन्न हो गये और उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर बड़े ही विनयपूर्वक भक्तिभावसे अनेक प्रकारसे उन भगवान् गजाननकी स्तुति की ॥ ४४ ॥ सभी बोले-जिन अनन्त शक्तिवाले परमेश्वरसे अनन्त जीव प्रकट हुए हैं; जिन निर्गुण अप्रमेय परमात्मासे उन (सत्त्वादि) गुणोंकी उत्पत्ति हुई है; सात्त्विक, राजस और तामस-इन तीन भेदोंवाला यह सम्पूर्ण जगत् जिनसे प्रकट एवं भासित हो रहा है, उन गणेशका हम सर्वदा नमन एवं भजन करते हैं ॥ ४५ ॥ जिनसे इस समस्त जगत्का प्रादुर्भाव हुआ है; जिनसे कमलासन ब्रह्मा, विश्वव्यापी विश्वरक्षक विष्णु, इन्द्र आदि देव-समुदाय और मनुष्य प्रकट हुए हैं, उन गणेशका हम सदा ही नमन एवं भजन करते हैं ॥ ४६ ॥ जिनसे अग्नि और सूर्यका प्राकट्य हुआ; पृथ्वी, जल, समुद्र, चन्द्रमा, आकाश और वायुका प्रादुर्भाव हुआ तथा जिनसे स्थावर-जंगम और वृक्षसमूह उत्पन्न हुए हैं, उन गणेशका हम सर्वदा नमन एवं भजन करते हैं। जिनसे दानव, किन्नर, चारण और यक्षसमूह प्रकट हुए; जिनसे हाथी और हिंसक जीव उत्पन्न हुए तथा जिनसे पक्षियों, कीटों और लता-बेलोंका प्रादुर्भाव हुआ, उन गणेशका हम सदा ही नमन और भजन करते हैं ॥ ४७-४८ ॥ जिनसे मुमुक्षुको बुद्धि प्राप्त होती है और अज्ञानका नाश होता है; जिनसे भक्तोंको सन्तोष देनेवाली सम्पदाएँ प्राप्त होती हैं तथा जिनसे विघ्नोंका नाश और समस्त कार्योंकी सिद्धि होती है, उन गणेशका हम सदा नमन एवं भजन करते हैं। जिनसे पुत्र-सम्पत्ति सुलभ होती है; जिनसे मनोवांछित अर्थ सिद्ध होता है; जिनसे अभक्तोंको अनेक प्रकारके विघ्न प्राप्त होते हैं तथा जिनसे शोक, मोह और काम प्राप्त होते हैं, उन गणेशका हम सदा नमन एवं भजन करते हैं ॥ ४९-५० ॥ जिनसे अनन्त शक्तिसम्पन्न सुप्रसिद्ध शेषनाग प्रकट हुए; जो इस पृथ्वीको धारण करने एवं अनेक रूप ग्रहण करनेमें समर्थ हैं; जिनसे अनेक प्रकारके अनेक स्वर्गलोक प्रकट हुए हैं, उन गणेशका हम सदा ही नमन एवं भजन करते हैं ॥ ५१ ॥ जिनके विषयमें वेदवाणी कुण्ठित है; जहाँ मनकी भी पहुँच नहीं है तथा श्रुति सदा सावधान रहकर 'नेति- नेति'-इन शब्दोंद्वारा जिनका वर्णन करती है; जो सच्चिदानन्दस्वरूप परब्रह्म हैं, उन गणेशका हम सदा ही नमन एवं भजन करते हैं ॥ ५२ ॥ ॥ इस प्रकार श्रीगणेशपुराणके अन्तर्गत उपासनाखण्डमें 'गणेशजीकी स्तुतिका वर्णन' नामक इक्यानबेवाँ अध्याय पूर्ण हुआ ॥ ९१ ॥ Kalyana Visheshank 2021_Section_10_1_Front