भारतकोश
श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

Ganesha Purana Gita Press Special Edition

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ

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३४ * पुराणं हि गणेशस्य काममोक्षप्रदं नृणाम् * [ श्रीगणेशपुराण- भगवान् श्रीगणेशजीकी आरती आरति गजवदन विनायक की। सुर-मुनि-पूजित गणनायक की ॥ टेक ॥ एकदंत शशिभाल गजानन, विघ्नविनाशक शुभगुण-कानन, शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन, दुःख-विनाशक सुखदायक की ॥ सुर० ॥ ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी समर्थ अति, विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति, अघ-वन-दहन, अमल अविगत-गति, विद्या-विनय-विभव-दायक की ॥ सुर० ॥ पिङ्गल नयन, विशाल शुण्डधर, धूम्रवर्ण शुचि वज्राङ्कुश-कर, लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर, सुर-वन्दित सब बिधि लायक की ॥ सुर० ॥