भारतकोश
श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

Ganesha Purana Gita Press Special Edition

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ

पृष्ठ 469, कुल 656 में से

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पृष्ठ 469

क्री०ख०-अ०८४ ] * बालक हेरम्बकी बाल-लीलामें दैत्योंके वधका आख्यान * ४६७ 卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐 गृध्रासुरकी चोंचको पकड़ लिया, जिससे उसकी साँस बाहर न निकल सकी ॥ ३३ ॥ श्वासके रुक जानेसे वह गृध्र प्राणहीन हो गया और उस बालकसहित वह भूमितलपर उसी प्रकार गिर पड़ा, जैसे कि वज्रसे आहत होकर पर्वत गिर पड़ता है। गिरते हुए उस गृध्रासुरकी दस योजन विस्तारवाली देहसे बहुत-से घर आदि चूर-चूर हो गये। यह एक महान् आश्चर्यजनक बात हुई! देवालय आदिमें स्थित वृक्षोंके टूट जानेसे पक्षिगण दिशाओंमें भाग चले। तब उस बालकको देखकर सखियाँ कहने लगीं—यह पार्वतीका पुत्र इस प्रकारसे गिरा है कि इसके शरीरमें कहीं भी चोट नहीं लगी है ॥ ३४-३६ १/२ ॥ ब्रह्माजी बोले—सखिजनोंका इस प्रकारका वचन सुनकर गौरीने शीघ्र ही बालकको पकड़ लिया और उसे अपने हृदयसे लगाकर उन्हें बड़ी प्रसन्नता हुई। उन्हें बड़ा ही आश्चर्य हुआ। उन्होंने [अरिष्टनिवारणार्थ] अनेकों प्रकारके दान दिये ॥ ३७-३८ ॥ तदनन्तर उन्होंने ब्राह्मणोंसे कहा—हे द्विजो ! इस समय तो इस बालकका महान् अरिष्ट चला गया है, आगे भी न हो, ऐसा कहकर ब्राह्मणोंको नमस्कार करके पार्वतीजी अपने भवनमें चली गयीं ॥ ३९ ॥ कहाँ तो वह दस योजन विस्तारवाला पराक्रमी गृध्रासुर और कहाँ यह कोमल शरीरवाला छोटा बालक ! फिर भी इसने उस असुरको मार डाला ॥ ४० ॥ इस समय बालकपनमें जब इसका इतना बल है, तो आगे चलकर यह न जाने क्या करेगा? इसे छोटा नहीं समझना चाहिये, जिस प्रकार आगकी एक चिनगारी विशाल काष्ठसमूहको भस्म कर डालती है, वैसे ही इसने भी उस विशाल असुरको मार डाला है ॥ ४१ १/२ ॥ गौरीने इस प्रकारकी बात अपनी सखियोंसे कही और फिर उन्होंने प्रसन्न होकर बालकको स्तनपान कराया। तदनन्तर शिवगणोंने उस गृध्रासुरकी देहके टुकड़ोंको दूर ले जाकर फेंक दिया। जो इस आख्यानका श्रवण करता है, वह असुरोंके द्वारा पराजित नहीं होता ॥ ४२-४३ ॥ ॥ इस प्रकार श्रीगणेशपुराणके क्रीडाखण्डमें 'गृध्रासुरवधवर्णन' नामक तिरासीवाँ अध्याय पूर्ण हुआ ॥ ८३ ॥ चौरासीवाँ अध्याय बालक हेरम्बकी बाल-लीलाद्वारा क्षेम, कुशल, क्रूर तथा बालासुर आदि दैत्योंके वधका आख्यान ब्रह्माजी बोले—बालक हेरम्बके दूसरे मासमें सायंकालके समय पार्वतीने उसे उबटन आदि लगाकर पालनेमें रखा और वे अत्यन्त प्रसन्नतापूर्वक गीत गाने लगीं। उसी समय क्षेम तथा कुशल नामक दो दैत्य, जो बालक हेरम्बका वध करना चाहते थे, वे दोनों मायावी चूहेका रूप धारणकर वहाँ आये ॥ १-२ ॥ नख तथा दाँत ही उन दोनोंके आयुधरूप थे, ऐसे वे दोनों भयानक चूहे घरके अन्दर आये और जहाँपर बालक हेरम्ब पालनेपर लेटा था, वहींपर आकर परस्पर लड़ने लगे। उन दोनों दुष्टोंके शरीरके बाल खड़े हो गये थे ॥ ३ ॥ उन दोनों चूहोंके चीत्कार शब्दसे कान बहरे हो गये थे तथा उनके पैरोंके आघातसे वहाँकी सम्पूर्ण भूमि जोती हुई भूमिके समान कृषियोग्य हो गयी। तब देवी पार्वती लाठी लेकर उन दोनों चूहोंको डराने लगीं तो भागते हुए वे दोनों ऊपरकी ओर जाने लगे ॥ ४-५ ॥ तदनन्तर परस्पर युद्ध करते हुए वे दोनों भयानक चूहे बालक हेरम्बके ऊपर गिरे। वक्षःस्थलमें चोट लगनेके कारण कर्कश शब्द करता हुआ वह श्रेष्ठ बालक हेरम्ब जग पड़ा। उस समय वे पार्वती डर गयीं। भयभीत हुएके समान बालकने भी अपने दोनों हाथोंको इधर-उधर चलाया। बालकके हाथोंके उस प्रहारसे वे दोनों प्राणहीन-से होकर भूमिपर गिर पड़े। उन दोनोंके मुखसे रक्त प्रवाहित हो रहा था। यह दृश्य देखकर पार्वतीजी अत्यन्त घबड़ा गयीं ॥ ६-८ ॥