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श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

Ganesha Purana Gita Press Special Edition

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ

पृष्ठ 536, कुल 656 में से

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पृष्ठ 536

५३४ * पुराणं हि गणेशस्य काममोक्षप्रदं नृणाम् * [ श्रीगणेशपुराण- 卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐 ब्रह्माजी बोले-इस प्रकार स्तुति करनेके अनन्तर यमराजने वस्त्रों, रत्नों तथा फलोंद्वारा उन मयूरेशका पूजन किया। मुनिबालकोंको लाकर उन्होंने मयूरेशको समर्पित कर दिया और स्वयं वे हाथ जोड़कर आगे खड़े हो गये। प्रसन्न होकर वे सभी बालक परस्पर एक- दूसरेका आलिंगन करने लगे और बोले ॥ ३०-३१ ॥ बालक बोले-हम लोग आपके दर्शनके लिये प्रतीक्षा करते-करते जब थक गये थे, उसी समय यमराज हमें बाँधकर यमलोक ले गये। आपके दर्शनसे हम मुक्त हो गये हैं, अब हम अपने-अपने घरोंको जायँगे ॥ ३२ ॥ ब्रह्माजी बोले-तदनन्तर वे सभी बालक मयूरेश्वरको आगे करके मयूरेशपुरीमें स्थित अपने-अपने आश्रमको गये। वहाँ विविध प्रकारके वाद्योंकी सर्वत्र ध्वनि हो रही थी। वह नगर अनेक प्रकारके ध्वज तथा पताकाओंसे सुशोभित हो रहा था और पुष्पोंकी मालाओंसे विभूषित था। उस महान् कौतुकको देखनेके लिये यमराज भी उनके पीछे-पीछे गये ॥ ३३-३४ ॥ वहाँ उन मयूरेशके समक्ष वे सभी मुनिगण आये। उन्होंने देव मयूरेशकी पूजा-स्तुति की और बालकोंका आलिंगन किया। पहले जो मुनिगण मयूरेशपर कुपित हो उठे थे, उन सभी मुनियोंसे मयूरेशने कहा-मैं क्षणभरमें यमलोकसे इन बालकोंको ले आया हूँ ॥ ३५-३६ ॥ मुनिगण बोले-आप हमारी सर्वत्र रक्षा करते हैं, आप सर्वशक्तिमान् हैं ॥ ३६१/२ ॥ ब्रह्माजी बोले-इस प्रकार कहकर और उनकी आज्ञा प्राप्त करके वे सभी मुनिगण अपने आश्रमोंको चले गये। यमराज भी उन मयूरेशको प्रणाम करके बड़ी प्रसन्नताके साथ अपनी पुरीको गये। देव मयूरेश भी अपने घर पहुँचे और माता पार्वती तथा पिता भगवान् शंकरको हर्षित किया ॥ ३७-३८ ॥ ॥ इस प्रकार श्रीगणेशपुराणके क्रीडाखण्डमें 'यमराजके गर्वके परिहारका वर्णन' नामक एक सौ आठवाँ अध्याय पूर्ण हुआ ॥ १०८ ॥ एक सौ नौवाँ अध्याय देवर्षि नारदसे शिव-पार्वतीका मयूरेशके विवाहके लिये कन्याके अन्वेषणके लिये कहना, देवर्षि नारदद्वारा सिद्धि एवं बुद्धि नामक कन्याओंको मयूरेशके योग्य बताना, शिव-पार्वती तथा ससैन्य मयूरेशका गण्डकी नगरकी ओर प्रस्थान, मार्गमें हेम नामक दैत्यका ससैन्य आगमन, मयूरेशकी कृपासे मुनिबालकोंद्वारा अभिमन्त्रित कुशोंसे असुर-सेनाका वध ब्रह्माजी बोले-एक बारकी बात है, भगवान् महेश्वर सुखपूर्वक आसनपर बैठे हुए थे, उस समय माता पार्वती उनसे बोलीं-हे महादेव ! मयूरेशकी अवस्था पन्द्रह वर्ष पार कर चुकी है, अतः अब आप उसके विवाहके विषयमें विचार कीजिये ॥ १ १/२ ॥ ये मयूरेश कामदेवसे भी अतुलनीय स्वरूपवाले हैं और इनके सभी अंग अत्यन्त सुन्दर हैं, अतः आप इनके लिये किसी सुन्दर शील-स्वभावसे सम्पन्न, सुन्दर मुखमण्डलवाली, नवयौवन-सम्पन्न, मृगके समान नेत्रोंवाली, हंसके समान चालवाली, कोयलके समान मधुर बोलनेवाली, सुन्दर नासिकावाली तथा क्षीण कटिवाली सुन्दर वधूका अन्वेषण कीजिये ॥ २-३ ॥ ब्रह्माजी बोले-पार्वतीके इस प्रकारके वचनोंको सुनकर वे 'बहुत अच्छी बात है-बहुत अच्छी बात है'-ऐसा कहने लगे। वे अपने मनमें इस प्रकारकी सुन्दर कन्याके विषयमें सोचने लगे, किंतु उनको ऐसी कन्या कहीं नहीं दिखायी दी। अतः वे भगवान् शिव अत्यन्त चिन्तित हो उठे, तभी देवर्षि नारद वहाँ आ पहुँचे। उन्हें आसनपर बिठाकर और उनकी पूजा करके देव शिव उनसे बोले ॥ ४-५ ॥ शम्भु बोले-हे मुने ! आपके आगमनसे बड़े ही आनन्दकी प्राप्ति हुई है। हे देवर्षे ! आप बहुत दिनोंके