श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)
Ganesha Purana Gita Press Special Edition
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 628, कुल 656 में से
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६२६ * पुराणं हि गणेशस्य काममोक्षप्रदं नृणाम् * [ श्रीगणेशपुराण- 卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐 सन्देहोंको नष्ट करनेवाला तीनों लोकोंमें दूसरा कोई | कलियुगसे सम्बन्धित कथाका वर्णन करूँगा ॥ १४ १/२ ॥ नहीं है ॥ २-४ ॥ | हे मुने! कलियुगके आ जानेपर लोग सदाचारसे ब्रह्माजी बोले—हे व्यास! विभु गजानन नानाविध | च्युत तथा असत्यभाषी हो जायेंगे। ब्राह्मण स्नान-सन्ध्या शक्तियोंसे सम्पन्न हैं, अतः उनके विषयमें सन्देह नहीं | तथा वेदाभ्यासका परित्याग कर देंगे। उनकी यजन, करना चाहिये। वे स्वेच्छावश कल्पोंके भेदसे भिन्न- | याजन तथा दानकृत्योंमें प्रवृत्ति नहीं होगी और वे दुष्ट भिन्न रूपोंमें अवतीर्ण हुआ करते हैं ॥ ५ ॥ | पुरुषोंसे अत्यन्त गर्हित दान ग्रहण करेंगे, सभी लोग कभी वे भगवान् शंकरके मुखसे, कभी उनके | दूसरेके कलंककी चर्चा करेंगे, निन्दामें तत्पर रहेंगे और क्रोधावेशसे, कभी पार्वतीजीके तेजसे, तो कभी उनके | परस्त्रियोंके साथ अनुचित व्यवहार करेंगे ॥ १५-१७ ॥ उदरसे और कभी उनके शरीरके मैल (उबटन)-से | वे लोग सब प्रकारसे कर्तव्योंका परित्याग कर देंगे अवतीर्ण हुए हैं। उनका स्वरूप कभी तो दो मुखोंवाला | और प्रत्येक स्थितिमें अवश्य ही विश्वासघात करेंगे। प्रकट हुआ और कभी पाँच एवं छः मुखोंसे युक्त | अवैध कार्योंको सफल बनानेके लिये वे मिथ्या शपथ दृष्टिगोचर होता रहा है। कभी वे दो भुजाओंसे समन्वित | ग्रहण करेंगे। हे मुनीश्वर! उस समय धरातलपर मेघ होते हैं, तो कभी [चार भुजाओं, छः भुजाओं और | कहीं भी [भलीभाँति] वर्षा नहीं करेंगे। महानदियोंके कभी] दश भुजाओं, द्वादश भुजाओं और सहस्र | तटवर्ती भूभाग भी कृषिके उपयोगमें लिये जायँगे। जो भुजाओंसे भी शोभित होते हैं। सभी आगमग्रन्थ उनके | बलवान् होगा, वह निर्बलके धनका बलात् अपहरण कर नानाविध ध्येय स्वरूपोंका निर्देश करते हैं। हे मुने! | लेगा और उससे दूसरे दो लोग मिलकर हरण करेंगे तथा [इसलिये] प्रभु गजाननके सम्बन्धमें तुम्हें विस्मय या | ऐसे ही उन दो बलवानोंसे तीन (अथवा अधिक) लोग संशय नहीं करना चाहिये ॥ ६-८ १/२ ॥ | बलपूर्वक [धन आदि] छीन लेंगे ॥ १८-२० १/२ ॥ लिंगपुराणमें शिवसे ब्रह्मा और विष्णुकी उत्पत्ति | कलियुगमें शूद्र वेदाभ्यास करेंगे और ब्राह्मण बतायी गयी है। स्कन्दपुराणमें ब्रह्माके नेत्रोंसे शिवका | शूद्रोचित कर्मोंमें प्रवृत्त हो जायँगे। क्षत्रिय वैश्योंके और प्रादुर्भाव वर्णित है। विष्णु शिवका ध्यान करते हैं और | वैश्य शूद्रोंके लिये विहित [जीविका-सम्बन्धी] कर्मोंका शिव भी विष्णुके ध्यानमें निरत रहते हैं। वे प्रभु शिव | सम्पादन करेंगे। ब्राह्मण चाण्डालतकसे दान ग्रहण पंचाक्षर मन्त्रके साथ तारक मन्त्रका उपदेश करते हैं। | करेंगे ॥ २१-२२ ॥ भगवान् शंकरने सौ करोड़ श्लोकोंमें रामचरित [का | [कलियुगके] विचारशून्य लोग धनहीन [और प्रणयन किया और उस]-को तीन भागोंमें विभक्तकर | शोकवश] हाहाकार करनेवाले होंगे। वे अपनी [एक-एक भाग स्वर्ग तथा पातालमें रखा और तीसरे | आवश्यकताओंको सामने रखकर दूसरोंसे धनकी याचना भागके सहित] तारकमन्त्र (रामनाम)-को पृथिवीलोकमें | करेंगे और [लौटानेके समय] कहेंगे कि हमने तो तुमसे स्थापित किया। यह सृष्टि कभी शिवसे, कभी विष्णुसे, | तनिक-सा भी धन नहीं लिया है। लोग रिश्वत लेकर कहीं देवीसे, कहीं सूर्यसे, कहीं गजाननसे तो कहीं | झूठी गवाही देंगे और सज्जनोंकी निन्दा तथा दुर्जनोंसे [निर्गुण निराकार] ब्रह्म [की सिसृक्षा]-से उत्पन्न | मित्रता करेंगे। द्विज व्यर्थमें ही [पशुओंको मारकर] बतायी गयी है। ये सभी परस्पर विरोधी बातें शास्त्रसम्मत | मांसका भक्षण करेंगे ॥ २३-२५ ॥ हैं। इनमें जो सन्देह करता है, वह निश्चय ही नरकगामी | [कलियुगमें] सत्पुरुषोंका उन्मूलन और दुराचारियोंका होता है ॥ ९-१३ १/२ ॥ | अभ्युदय देखा जायगा। लोग देवताओंकी अर्चनाका ब्रह्माजी बोले—हे मुने! इस प्रकार द्वापरयुगकी | त्याग करके ऐन्द्रिक अर्थात् इन्द्रजालसम्बन्धिनी (जादू- समस्त [लीला] कथा मैंने आपको बतलायी, अब मैं | टोना) विद्याओंका आश्रय लेंगे। वे भूत-प्रेत-पिशाचादिकी