भारतकोश
गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished634 पृष्ठ

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पृष्ठ 386
३७६संक्षिप्त गरुडपुराण[ आचार-

रगण (ऽ।ऽ), नगण (।।।), नगण (।।।), नगण (।।।) तथा एक गुरु (ऽ) होता है और जिसमें सात तथा नौ वर्णोंपर यति हो तो उसे वृषभगजजृम्भित छन्द कहते हैं। जिसके सभी चरणोंमें नगण (।।।), जगण (।ऽ।), भगण (ऽ।।), जगण (।ऽ।), रगण (ऽ।ऽ) और एक गुरु (ऽ) हो, उसका नाम वाणिनी छन्द है। यति चरणकी समाप्तिपर होती है। पिङ्गलद्वारा इन दोनों छन्दोंको अष्टि श्रेणीके छन्दके अन्तर्गत स्वीकार किया गया है।

यगण (।ऽऽ), मगण (ऽऽऽ), नगण (।।।), सगण (।।ऽ), भगण (ऽ।।), एक लघु (।) और एक गुरु (ऽ)-से संयुक्त चरणवाले छन्दका नाम शिखरिणी है। इसमें यति छः तथा ग्यारह वर्णोंपर होती है। पृथ्वी छन्दके प्रत्येक चरणमें जगण (।ऽ।), सगण (।।ऽ), जगण (।ऽ।), सगण (।।ऽ), यगण (।ऽऽ), एक लघु (।) तथा एक गुरु (ऽ) होता है। इसकी यति आठ और नौ वर्णोंपर होती है। जिस छन्दके चरण भगण (ऽ।।), रगण (ऽ।ऽ), नगण (।।।), नगण (।।।), भगण (ऽ।।), एक लघु (।) तथा एक गुरु (ऽ)-से संयुक्त होते हैं और जिनमें दस एवं सात वर्णोंपर यति होती है, उसे वंशपत्रपतित कहा गया है।

हरिणी छन्द नगण (।।।), सगण (।।ऽ), मगण (ऽऽऽ), रगण (ऽ।ऽ), सगण (।।ऽ), एक लघु (।) और एक गुरु (ऽ)-से संसृष्ट होता है। इसमें यति क्रमशः छः, चार तथा सात वर्णोंपर होती है। मगण (ऽऽऽ), भगण (ऽ।।), नगण (।।।), तगण (ऽऽ।), तगण (ऽऽ।), दो गुरु (ऽऽ)-से युक्त चरणोंवाले छन्दको मन्दाक्रान्ता कहते हैं। इसमें चार, छः और सात वर्णोंपर यति होती है। नर्द्दटक छन्द नगण (।।।), जगण (।ऽ।), भगण (ऽ।।), जगण (।ऽ।), जगण (।ऽ।), एक लघु (।) और एक गुरु (ऽ)-से संयुक्त होता है। इसमें यति सात और दस वर्णोंपर होती है। यदि यही यति सात, छः और चार वर्णोंपर हो तो छन्दका नाम कोकिलक हो जाता है। शिखरिणीसे कोकिलकतक इन छन्दोंको सत्रह वर्णोंवाले अत्यष्टि छन्द-वर्गमें समझना चाहिये।

जिस छन्दमें मगण (ऽऽऽ), तगण (ऽऽ।), नगण (।।।), यगण (।ऽऽ), यगण (।ऽऽ), यगण (।ऽऽ) होता है और पाँच, छः तथा सात वर्णोंपर यति होती है, उसको कुसुमितलता छन्द कहते हैं। इसे अठारह अक्षरोंके चरणवाले धृति छन्दका अवान्तर भेद कहा गया है।

यगण (।ऽऽ), मगण (ऽऽऽ), नगण (।।।), सगण (।।ऽ), रगण (ऽ।ऽ), रगण (ऽ।ऽ) और एक गुरु (ऽ)-से युक्त छन्दका नाम मेघविस्फूर्जिता है। इसमें छः, छः और सात वर्णोंपर यति होती है। शार्दूलविक्रीडित नामक जो छन्द है, उसके प्रत्येक चरणमें मगण (ऽऽऽ), सगण (।।ऽ), जगण (।ऽ।), सगण (।।ऽ), दो तगण (ऽऽ।, ऽऽ।) तथा एक गुरु (ऽ) होता है। इसमें बारह और सात वर्णोंपर यतिका विधान है। ये दोनों उन्नीस वर्णोंके चरणवाले अतिधृति छन्द-वर्गके भेद कहे गये हैं।

इसके बाद बीस वर्णोंके चरणवाले कृति नामवाले छन्दोंका निरूपण किया जा रहा है—

जिसके प्रत्येक चरणमें भगण (ऽ।।), रगण (ऽ।ऽ), मगण (ऽऽऽ), नगण (।।।), यगण (।ऽऽ), भगण (ऽ।।), एक लघु (।), एक गुरु (ऽ) होता है और क्रमशः सात, सात तथा छः वर्णोंपर यति होती है, उसे सुवदना छन्द कहते हैं। जिसके प्रत्येक पादमें रगण (ऽ।ऽ), जगण (।ऽ।), रगण (ऽ।ऽ), जगण (।ऽ।), रगण (ऽ।ऽ), जगण (।ऽ।), एक लघु (।), एक गुरु (ऽ) हो और