भारतकोश
गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished634 पृष्ठ

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७०संक्षिप्त गरुडपुराण[ आचार-

विविध शालग्रामशिलाओंके लक्षण

**श्रीहरिने कहा—**हे वृषभध्वज! अब मैं प्रसंगवश शालग्रामका लक्षण कहता हूँ। शालग्रामशिलाओंके स्पर्शमात्रसे करोड़ों जन्मोंके पाप नष्ट हो जाते हैं। केशव, नारायण, गोविन्द तथा मधुसूदन आदि नामोंवाली विभिन्न शालग्रामशिलाएँ होती हैं, जो शंख, चक्र आदि चिह्नोंसे सुशोभित रहती हैं। इन शिलाओंके लक्षण इस प्रकार हैं—

शंख, चक्र, गदा तथा पद्मके चिह्नसे सुशोभित शिला ‘केशव’, पद्म, कौमोदकी* गदा, चक्र तथा शंखके चिह्नसे सुशोभित शिला ‘नारायण’, चक्र, शंख, पद्म तथा गदाके चिह्नसे विभूषित शिला ‘माधव’ और गदा, पद्म, शंख तथा चक्रके चिह्नसे शोभायमान शिला ‘गोविन्द’ नामसे जानी जाती है।

पद्म, शंख, चक्र, गदासे युक्त ‘विष्णु’ नामकी, शंख, पद्म, गदा तथा चक्रसे युक्त ‘मधुसूदन’ नामकी, गदा, चक्र, शंख, पद्मसे संयुक्त ‘त्रिविक्रम’ नामकी, चक्र, गदा, पद्म, शंखसे चिह्नित ‘वामन’ नामकी, चक्र, पद्म, शंख एवं गदासे समन्वित ‘श्रीधर’ नामकी और पद्म, गदा, शंख, चक्रसे अंकित ‘हृषीकेश’ नामकी शालग्राम-मूर्ति कही गयी हैं। इन देवमूर्तियोंको बार-बार नमन है।

पद्म, चक्र, गदा, शंख-चिह्नपूरित शालग्रामशिला ‘पद्मनाभ’, शंख, चक्र, गदा, पद्मयुक्त शालग्रामशिला ‘दामोदर’, चक्र, शंख, गदा तथा पद्मसे संयुक्त शालग्रामशिला ‘वासुदेव’, शंख, पद्म, चक्र, गदा-चिह्नसे समन्वित शालग्रामशिला ‘संकर्षण’, शंख, गदा, पद्म, चक्रसे सुशोभित शालग्रामशिला ‘प्रद्युम्न’ तथा गदा, शंख, पद्म और चक्रसे शोभित शालग्रामशिला ‘अनिरुद्ध’ नामसे अभिहित है। इन्हें बारम्बार प्रणाम है।

पद्म, शंख, गदा, चक्रके चिह्नसे विभूषित ‘पुरुषोत्तम’ नामकी, गदा, शंख, चक्र, पद्म-चिह्नसे विभूषित ‘अधोक्षज’ नामकी, पद्म, गदा, शंख, चक्रसे विभूषित ‘नृसिंह’ नामकी, पद्म, चक्र, शंख, गदासे अंकित ‘अच्युत’ नामकी और शंख, चक्र, पद्म, गदासे संयुक्त ‘जनार्दन’ की शालग्राम-मूर्ति है—इन देवनामोंसे अभिहित मूर्तियोंको नमस्कार है।

गदा, चक्र, पद्म, शंखसे अंकित शालग्राम ‘उपेन्द्र’, चक्र, पद्म, गदा, शंखसे युक्त शालग्राम ‘हरि’, गदा, पद्म, चक्र, शंख-चिह्नसे शोभित शालग्राम ‘श्रीकृष्ण’ नामसे प्रसिद्ध हैं और शालग्रामशिलाके द्वारदेशपर चिह्नित दो चक्र धारण करनेवाले, शुक्लवर्णवाले भगवान् वासुदेव हैं। इन सभी रूपों एवं नामोंको धारण करनेवाले हे गदाधर भगवान् विष्णु! हम सबकी आप रक्षा करें।

दो चक्रोंसे युक्त, रक्त आभावाली और पूर्वभागमें पद्म-चिह्नसे अंकित शालग्रामशिला ‘संकर्षण’ की मूर्ति होती है, किंतु छोटे-छोटे चक्रोंवाली तथा पीतवर्णकी होनेपर वह शिला ‘प्रद्युम्न’ कही जाती है। यदि शालग्रामशिला बड़ी तथा छिद्रसे संयुक्त शिरोभागवाली और वर्तुलाकार हो तो उसे ‘अनिरुद्ध’ नामक शालग्राम-मूर्ति कहते हैं। जो द्वारमुखपर नीलवर्णकी तीन रेखाओंसे युक्त होती है और जिसका शेष सम्पूर्ण भाग कृष्णवर्णसे सुशोभित रहता है, वह शालग्रामशिला ‘नारायण’ शिलाके नामसे जानी जाती है।

जिस शिलाके मध्यमें गदाके समान रेखा हो, यथास्थान नाभिचक्र उन्नत हो तथा वक्षःस्थल विस्तृत हो, वह ‘नृसिंह’ नामवाली शालग्रामशिला है और


* श्रीविष्णुकी गदाका नाम 'कौमोदकी' है।

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