गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 106, कुल 360 में से
संदर्भ में पढ़ेंसानुवाद-मिताक्षरावृत्तिसहितानि ४१
सोई हुई, मूर्च्छित या प्रमत्त कन्या के साथ संगम पैशाच विवाह होता है ॥ ११ ॥
एवमष्टौ विवाहा उक्तास्तेषु—
चत्वारो धर्म्याः प्रथमाः ॥ १२ ॥
आदितश्चत्वारो विवाहाः सर्ववर्णानां धर्म्या धर्मादनपेताः प्रशस्ता भवन्ति ॥ १२ ॥
( इनमें ) प्रथम चार प्रकार के विवाह सभी वर्णों के लिए धर्मविहित हैं ॥ १२ ॥
षडित्येके ॥ १३ ॥
एके स्मर्तारः षड्धर्म्या इत्याहुः । गान्धर्वासुरयोरपि धर्मादनपेतत्वमिच्छन्ति ॥ १३ ॥
कुछ स्मृतिकार प्रथम छः प्रकार के विवाहों को धर्मसंगत मानते हैं । ( अर्थात् गान्धर्व और आसुर विवाह को भी धर्मानुकूल मानते हैं । ) ॥ १३ ॥
अथ विवाहे क्षत्रियादिषु स्त्रीषु ब्राह्मणादिभ्यो जातानां पुत्राणां शास्त्रेषु संकेतितं संज्ञाभेदमाह—
अनुलोमा अनन्तरैकान्तरद्वयन्तरासु जाताः सवर्णाम्बष्ठोग्रनिषाददौष्मन्तपारशवाः ॥ १४ ॥
ब्राह्मणस्यानन्तरा क्षत्रिया तस्यां जातः सवर्णः । क्षत्रियस्य वैश्या तस्यां तस्मादम्बष्ठः । वैश्यस्यानन्तरा शूद्रा तस्यां तस्मादुग्रः । ब्राह्मणस्यैकान्तरा वैश्या तस्यां तस्मान्निषादः । क्षत्रियस्यैकान्तरा शूद्रा तस्यां तस्माद्दौष्मन्तः ब्राह्मणस्य द्वयन्तरा शूद्रा तस्यां तस्मात्पारशवः । प्रपञ्चो जातिनिर्णयस्य स्मृत्यन्तरे द्रष्टव्यः ॥ १४ ॥
अनुलोम विवाहों ( उच्चवर्ण के पुरुष का अपने से निम्नवर्ण की स्त्री से विवाह ) में अनन्तर ( अर्थात् अपने वर्ण से ठीक दूसरे निम्न वर्ण की स्त्री से विवाह द्वारा जैसे ब्राह्मण और क्षत्रिया, क्षत्रिय और वैश्या, वैश्य और शूद्रा के विवाह द्वारा ), एकान्तर ( पुरुष और उससे निम्नवर्ण की स्त्री के वर्णों में वर्णक्रम से एक वर्ण का अन्तर हो, जैसे ब्राह्मण और वैश्या क्षत्रिय और शूद्रा के विवाह द्वारा ) तथा द्वयन्तर ( ब्राह्मण और शूद्रा के ) विवाहों द्वारा क्रमशः सवर्ण, अम्बष्ठ, उग्र, निषाद, दौष्मन्त और पारशव नाम के पुत्र उत्पन्न होते हैं ॥ १४ ॥