भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

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पृष्ठ 109

४४ गौतमधर्मसूत्राणि

मुत्पादयति सोऽम्बष्ठ एव भवति । ( ? ) एवमम्बष्ठयोरपि द्रष्टव्यम् ॥१९॥

चारों वर्णों के अनन्तर क्रम से अनुलोम विवाहों द्वारा उत्पन्न सवर्ण, अम्बष्ठ, उग्र के वर्ण का भी उत्कर्ष और अपकर्ष उपर्युक्त विधि से क्रमशः सातवीं और पाँचवीं पीढ़ी में परस्पर विवाह द्वारा होता है । (उदाहरण—सवर्ण से अम्बष्ठ वर्ण की स्त्री का विवाह हो; उनसे उत्पन्न कन्या का सवर्ण से विवाह हो इसी प्रकार सातवीं पीढ़ी में जो सन्तान होगी वह सवर्ण होगी और उसके वर्ण का उत्कर्ष हो जायगा । इसके विपरीत यदि सवर्णा कन्या का अम्बष्ठ के साथ विवाह हो; उनसे उत्पन्न कन्या का भी अम्बष्ठ से विवाह हो तो इस प्रकार पाँचवीं पीढ़ी में उत्पन्न सन्तान अम्बष्ठ होगी ) ॥ १९ ॥

प्रतिलोमास्तु धर्महीनाः ॥ २० ॥

प्रतिलोमजाताः सूतादयो धर्महीना उपनयनादिधर्महीना । तत्र सूतस्यैकस्योपनयनमात्रं शाखान्तरेऽङ्गीकृतम् ॥ २० ॥

प्रतिलोम विवाहों से उत्पन्न सन्तानों ( सूत, मागध, आयोगव, क्षत, वैदेहक और चण्डाल ) के उपनयन आदि धर्म नहीं होते ॥ २० ॥


शूद्रायां च ॥ २१ ॥

आनुलोम्येनापि शूद्रायामुत्पन्नः पारशवादिर्धर्महीनः । एवं च सवर्णादीनामनुलोमानां सिद्धो धर्माङ्गीकारः । तथा च मनुः—

स्वजातिजात्यन्तरजाः षट् सुता द्विजधर्मिणः ।
शूद्राणां तु सधर्माणः सर्वेऽपध्वंसजाः स्मृताः ॥ २१ ॥

अनुलोम विवाहों द्वारा शूद्रा स्त्री से उत्पन्न ( पारशव, यवन करण, शूद्र ) सन्तान भी धर्महीन होती है ॥ २१ ॥


असमानायां तु शूद्रात्पतितवृत्तिः ॥ २२ ॥

शूद्रादसमानायां वैश्यादिस्त्रियामुत्पादित आयोगवादिः पतितवृत्तिः पतितवद्दर्शनस्पर्शनप्रतिग्रहादौ वर्जनीयः । एवं च वैश्यात्क्षत्रियायां क्षत्रियाद् ब्राह्मण्यां जातो न पतितवृत्तिः ॥ २२ ॥

शूद्र पुरुष द्वारा वैश्य आदि असमान वर्ण की स्त्रियों से उत्पन्न आयोगव आदि पुत्र पतित होते हैं ( पतित के समान उनका दर्शन, स्पर्श और प्रतिग्रह वर्जित है ) ॥ २२ ॥


अन्त्यः पापिष्ठः ॥ २३ ॥

शूद्रादसमानाज्जनितेषु तेषु योऽन्त्यो ब्राह्मण्यां जातश्चण्डालः पापिष्ठोऽत्यन्तं वर्जनीयः । तथा च स्मृत्यन्तरम्—