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गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

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की रचना हुई। डा० काणे को यह मत स्वीकार नहीं है, क्योंकि प्राचीन ग्रन्थों के विषय में हमारा ज्ञान अल्प है तथा श्लोक छन्द वाले कुछ ग्रन्थ जैसे मनुस्मृति कुछ धर्मसूत्रों यथा विष्णु-धर्मसूत्र से प्राचीन है और वशिष्ठधर्मसूत्र के समय का है। इसी प्रकार कुछ बहुत पुराने सूत्रों यथा बौधायनधर्मसूत्र में भी श्लोक उद्धृत हैं। "इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि श्लोकबद्ध ग्रन्थ धर्मसूत्रों से पूर्व भी विद्यमान थे"—काणे, वही, पृ० ९।

धर्मसूत्रों में प्राचीनतम गौतमधर्मसूत्र है। इसके विषय में आगे विस्तारपूर्वक कहा जायगा। इसका रचनाकाल ६०० वि० पू० और ४०० वि० पू० के बीच माना जाता है।

बौधायन धर्मसूत्र

बौधायन का धर्मसूत्र चार प्रश्नों में विभक्त है, इनमें अन्तिम प्रश्न परिशिष्ट माना जाता है और उसे बाद के समय की रचना मानते हैं। यह आपस्तम्ब धर्मसूत्र से पहले के समय का है। इसमें दो बार गौतम के नाम का तथा एक बार उनके धर्मसूत्र का उल्लेख आता है। बौधायन ने अनेक आचार्यों के नाम गिनाये हैं तथा उपनिषदों के उद्धरण दिये हैं। कुमारिल ने बौधायन को आपस्तम्ब से बाद के समय का माना है। बौधायन का काल ई० पू० २००-५०० के बीच माना जाता है।

आपस्तम्ब धर्मसूत्र

इस धर्मसूत्र में दो प्रश्न हैं जिनमें प्रत्येक में ग्यारह पटल हैं। सभी सूत्रों में यह सूत्र छोटा है और इसकी शैली बड़ी चुस्त है, भाषा भी पाणिनि से बहुत पहले की है। अधिकांश सूत्र गद्य में हैं किन्तु यत्र-तत्र श्लोक भी हैं। इसका संबन्ध पूर्वमीमांसा से दिखाई पड़ता है। यह बहुत प्रामाणिक माना जाता रहा है। इसका समय ६००-३०० ई० पू० स्वीकार किया गया है।

हिरण्यकेशि धर्मसूत्र

हिरण्यकेशीकल्प का २६ वां और २७ वां प्रश्न है। प्रायः इसे स्वतन्त्र धर्मसूत्र नहीं माना जाता, क्योंकि इसमें आपस्तम्ब धर्मसूत्र से सैकड़ों सूत्र लिये गये हैं।

वसिष्ठ धर्मसूत्र

इसके कई संस्करण हैं। जीवानन्द के संस्करण में २० अध्याय हैं तथा ३१ वें अध्याय का कुछ अंश है। इसके अतिरिक्त इसके ३० अध्यायों, ६ अध्यायों एवं २१ अध्यायों के अलग-अलग संस्करण भी हैं। इससे पता चलता है कि यह कालान्तर में परिबृंहित, परिवर्धित और परिवर्तित होता रहा है। इसका समय ३००-२०० ई० पू० है।