गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
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विष्णु धर्मसूत्र
इस सूत्र में १०० अध्याय हैं, किन्तु सूत्र छोटे हैं। पहला अध्याय और अन्त के दो अध्याय पद्य में हैं। शेष में गद्य है या गद्य और पद्य का मिश्रण। इसका संबन्ध यजुर्वेद की कठ शाखा से बताया गया है। इसमें भिन्न-भिन्न कालों के अंश दृष्टिगोचर होते हैं, जिससे इसका काल निश्चित करना कठिन होता है। इसके आरम्भ के अंशों का समय ३००-१०० ई० पू० के बीच माना जा सकता है। इसमें भगवद्गीता, मनुस्मृति तथा याज्ञवल्क्यस्मृति से बहुत सी बातें ली गयी हैं।
हारीत धर्मसूत्र
इस सूत्र का ज्ञान उद्धरणों से मिलता है। अनेक धर्मशास्त्रकारों ने इनका उल्लेख किया है। इसमें गद्य के साथ अनुष्टुप् एवं त्रिष्टुप् छन्द का प्रयोग है। हारीत का संबन्ध कृष्णयजुर्वेद से है, किन्तु उन्होंने सभी वेदों से उद्धरण लिये हैं। इससे यह भी ज्ञात होता है कि वे किसी एक वेद से संबद्ध नहीं थे।
शंखलिखित धर्मसूत्र
यह शुक्लयजुर्वेद की वाजसनेयि शाखा का धर्मसूत्र था। 'तन्त्रवार्तिक' में इस सूत्र के अनुष्टुप् श्लोकों का उद्धरण है। याज्ञवल्क्य और पराशर ने इनका उल्लेख किया है। "जीवानन्द के स्मृतिसंग्रह में इस धर्मसूत्र के १८ अध्याय एवं शंखस्मृति के ३३० तथा लिखितस्मृति के ९३ श्लोक पाये जाते हैं। यह धर्मसूत्र गौतम एवं आपस्तम्ब के बाद के काल का है और इसकी रचना का समय ई० पू० ३०० से ई० सन् १०० के बीच है।
अन्य सूत्र ग्रन्थ
अनेक धर्मसूत्र धर्मविषयक ग्रन्थों में विकीर्ण हैं। उनमें इन आचार्यों के सूत्र ग्रन्थ गिनाये जाते हैं—अत्रि, उशना, कण्व एवं काण्व, कश्यप एवं काश्यप, गार्ग्य, च्यवन, जातूकर्ण्य, देवल, पैठीनसि, बुध, बृहस्पति, भरद्वाज एवं भारद्वाज, शातातप, सुमन्तु आदि।
धर्मसूत्रों का वर्ण्यविषय
धर्मसूत्रों का मुख्य वर्ण्यविषय है "आचार, विधि-नियम, एवं क्रियासंस्कार"। ये इन्हीं का विधिवत् विवेचन करते हैं। निश्चय ही, धर्मसूत्र कभी-कभी गृह्यसूत्रों के प्रतिपाद्य विषयों के भी क्षेत्र में पहुँच जाते हैं, किन्तु ऐसा कम स्थलों पर हुआ है। गृह्यसूत्रों का ध्येय गृह्ययज्ञ, प्रातः सायंपूजन, पके हुए भोजन की बलि, वार्षिक यज्ञ, विवाह, पुंसवन, जातकर्म, उपनयन एवं दूसरे संस्कार, छात्रों एवं स्नातकों के नियम, मधुपर्क और श्राद्धकर्म का वर्णन करना तथा इनकी विधियों को स्पष्ट करना है। इस प्रकार गृह्यसूत्रों का स्पष्ट संबन्ध घरेलू जीवन तथा व्यक्तिगत जीवन से है। ये कर्त्तव्यों ( duties ) और कानून ( laws ) को अपना विषय नहीं बनाते। इनके विपरीत धर्मसूत्र मनुष्य को समाज में लाकर खड़ा कर देता